गोरखपुर। CBSE द्वारा लागू की गई नई त्रिभाषा नीति, जिसमें तीन में से कम से कम दो भाषाओं का भारतीय होना अनिवार्य किया गया है, का सरस्वती शिशु मंदिर पक्कीबाग, गोरखपुर के प्रधानाचार्य डॉ. राजेश सिंह ने स्वागत किया है। उन्होंने इसे भारतीय भाषाओं और स्थानीय साहित्य के पुनरुत्थान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है।
डॉ. राजेश सिंह ने कहा कि अंग्रेज़ी के साथ-साथ हिंदी, संस्कृत एवं विभिन्न भारतीय क्षेत्रीय भाषाओं का अध्ययन विद्यार्थियों को अपनी जड़ों तथा भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का कार्य करेगा। इससे छात्रों में भारतीय भाषा-साहित्य, लोककथाओं, लोकगीतों और पारंपरिक ज्ञान के प्रति गर्व की भावना विकसित होगी। उन्होंने कहा कि यह नीति केवल भाषाई पहचान तक सीमित नहीं है, बल्कि संस्कारवान और संवेदनशील नागरिक निर्माण की मजबूत नींव भी रखेगी।
उन्होंने अभिभावकों की संभावित चिंताओं को दूर करते हुए स्पष्ट किया कि तीसरी भाषा (R3) के लिए किसी प्रकार की अलग बोर्ड परीक्षा आयोजित नहीं की जाएगी। इसका मूल्यांकन पूरी तरह स्कूल स्तर पर आंतरिक रूप से किया जाएगा।
डॉ. राजेश सिंह ने कहा कि CBSE की यह नीति विद्यार्थियों पर अतिरिक्त बोझ डालने के बजाय, तनावमुक्त वातावरण में उनकी भाषा दक्षता और आत्मविश्वास को बढ़ाने के उद्देश्य से तैयार की गई है।

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