बस्ती। गायत्री शक्तिपीठ बस्ती में गंगा दशहरा एवं गायत्री जयंती का पर्व 26 मई 2026 को आध्यात्मिक वातावरण में श्रद्धा एवं भक्ति के साथ मनाया गया। इस अवसर पर एक दिन पूर्व 25 मई से प्रारंभ हुआ गायत्री मंत्र का अखंड जप विशेष आकर्षण का केंद्र रहा, जिसमें महिला एवं पुरुष श्रद्धालुओं ने अलग-अलग समय पर सहभागिता की।
गायत्री शक्तिपीठ के वरिष्ठ परिव्राजक/ट्रस्टी राम प्रसाद त्रिपाठी ने बताया कि 25 मई को प्रातः 7 बजे पुष्पा सिंह एवं उनके पति द्वारा अखंड जप का शुभारंभ किया गया, जो शाम तक बहनों तथा रात्रि में भाइयों द्वारा निरंतर जारी रहा। 26 मई की सुबह जप का समापन हुआ, जिसके पश्चात यज्ञ एवं विविध संस्कार संपन्न कराए गए।
अपराह्न 3 बजे से आयोजित ज्ञान यज्ञ का शुभारंभ गायत्री एवं गुरुदेव की प्रार्थना के साथ हुआ। मुख्य अतिथि राजेंद्र नाथ तिवारी ने गंगा एवं गायत्री के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गंगा स्नान से शरीर और मन की शुद्धि होती है, जबकि गायत्री मंत्र जप से आत्मा का परिष्कार होता है तथा व्यक्ति में सकारात्मक सोच का विकास होता है।
विशिष्ट अतिथि नीलम सिंह राणा एवं दिनेश प्रताप सिंह ने समाज में अनीति के विरुद्ध संगठित होकर संघर्ष करने का आह्वान किया। कार्यक्रम में अतिथियों का स्वागत एवं सम्मान शक्तिपीठ के संस्थापक ट्रस्टी रामचन्द्र शुक्ल द्वारा माल्यार्पण, अंगवस्त्र एवं युग साहित्य भेंट कर किया गया।
कार्यक्रम का संचालन राम प्रसाद त्रिपाठी ने किया। उन्होंने गायत्री परिवार के संस्थापक पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि 21वीं सदी नारी सदी है और समाज में सत्य, न्याय, प्रेम एवं सद्भाव की स्थापना में मातृशक्ति की महत्वपूर्ण भूमिका है।
महिला मंडल की जिला संयोजिका प्रतिमा सिंह एवं नगर संयोजिका निर्मला सिंह ने अतिथियों का स्वागत किया। इस अवसर पर सीमा खरे, वंदना पांडे, अर्चना, बिट्टू, अंजू, आभा सिंह, गुड्डन पांडे, अनुजा सिंह, कांति चौरसिया सहित अनेक महिलाओं ने जप एवं आयोजन में सक्रिय सहयोग किया।
श्याम पांडे, स्वामी दयाल तिवारी एवं विशाल तिवारी ने दीप यज्ञ एवं पर्व पूजन संपन्न कराया, जबकि जगदंबिका पाण्डेय, सर्वेश श्रीवास्तव, के.के. पाण्डेय, राजकुमार, पिंटू, शिवम, अमित, अमन एवं प्रदीप सहित कई श्रद्धालुओं ने आयोजन में सहभागिता की।
कार्यक्रम के अंत में गायत्री जयंती पर पूज्य गुरुदेव को श्रद्धांजलि अर्पित की गई तथा उनके विचारों को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया गया। अंत में सामूहिक सहभोज एवं भंडारे के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।

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