गोरखपुर। नागरिक समाज गोरखपुर की ओर से सोमवार को जिला अधिकारी कार्यालय पर वरिष्ठ पत्रकार सत्यम वर्मा और दिशा छात्र संगठन की कार्यकर्ता आकृति चौधरी पर उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) लगाए जाने के विरोध में प्रतिवाद सभा आयोजित की गई। सभा के बाद जिलाधिकारी के माध्यम से राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा गया। कार्यक्रम में नागेंद्र, डॉ. संपूर्णानंद मल्ल, बैजनाथ मिश्र, उदयभान, विनय, आशीष, लवकुश, अम्बरीष, आदेश आकाश और धर्मराज सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का संचालन करते हुए धर्मराज ने कहा कि नोएडा में श्रमिक आंदोलन के खिलाफ प्रदेश सरकार द्वारा दमनात्मक कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि वरिष्ठ पत्रकार, अनुवादक व सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ता सत्यम वर्मा तथा थियेटर आर्टिस्ट आकृति चौधरी के खिलाफ एनएसए के तहत कार्रवाई की गई है, जबकि न्यायालय में पुलिस प्रशासन पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर पाया है।
सभा में सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. संपूर्णानंद मल्ल ने आरोप लगाया कि लखनऊ स्थित जनचेतना पुस्तक प्रतिष्ठान एवं पुस्तकालय पर बिना वारंट छापेमारी कर सत्यम वर्मा को हिरासत में लिया गया और बाद में उनकी गिरफ्तारी नोएडा से दिखाई गई। उन्होंने कहा कि आकृति चौधरी समेत अन्य कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी से संबंधित सीसीटीवी फुटेज भी अदालत के संज्ञान में लाई गई है।
माले जिला सचिव नागेश ने कहा कि सरकार ने 17 अप्रैल 2026 के नोटिफिकेशन में स्वीकार किया है कि 2019 और 2024 में न्यूनतम मजदूरी का संशोधन नहीं किया गया, जिससे श्रमिक असंतोष बढ़ा। उन्होंने कहा कि बाद में न्यूनतम वेतन में 21 प्रतिशत वृद्धि की घोषणा से स्पष्ट है कि आंदोलन के पीछे मजदूरों की वास्तविक समस्याएं थीं।
सभा में वक्ताओं ने कहा कि सत्यम वर्मा एक वरिष्ठ पत्रकार, संपादक और अनुवादक हैं, जिन्होंने जनपक्षधर मुद्दों पर लगातार काम किया है। वहीं आकृति चौधरी दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास में स्नातकोत्तर हैं और सामाजिक-सांस्कृतिक गतिविधियों से जुड़ी रही हैं।
ज्ञापन के माध्यम से राज्यपाल से मांग की गई कि सत्यम वर्मा और आकृति चौधरी पर लगाया गया एनएसए तत्काल वापस लिया जाए, नोएडा श्रमिक आंदोलन पर दमन रोका जाए, गिरफ्तार मजदूरों और सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ताओं को बिना शर्त रिहा किया जाए तथा मजदूरों के लिए न्यूनतम वेतन 26 हजार रुपये सुनिश्चित किया जाए।

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