लखनऊ। राजधानी के ऐतिहासिक प्रांगण में आयोजित ‘स्वर्णकार समाज समागम महापंचायत’ स्वाभिमान, एकजुटता और शक्ति का प्रतीक बनकर उभरी। इस विशाल आयोजन में भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश मंत्री एवं सह-प्रभारी ज्योति सोनी ने अपने ओजस्वी और तीखे संबोधन से हजारों की भीड़ में नई ऊर्जा का संचार कर दिया। प्रदेशभर से आए स्वर्णकार समाज के लोगों और मातृशक्ति का स्वागत करते हुए उन्होंने समाज के अधिकारों और भविष्य की स्पष्ट रूपरेखा रखी।
व्यापारिक हितों और सुरक्षा पर जोर
ज्योति सोनी ने समाज की प्रमुख समस्याओं को उठाते हुए कहा कि स्वर्णकार समाज देश की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण स्तंभ है, लेकिन आज व्यापारी वर्ग खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा है। उन्होंने मांग की कि व्यापारिक सुरक्षा, सरल बीमा नीतियां और उत्पीड़न मुक्त वातावरण सुनिश्चित किया जाए।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि मेहनतकश व्यापारियों की सुरक्षा और सम्मान सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।
"याचना नहीं, अब रण होगा" का आह्वान
अपने भाषण के दौरान उन्होंने मंच से जोरदार हुंकार भरते हुए कहा—
“हमारे धैर्य को हमारी कमजोरी न समझा जाए। हमने हमेशा शालीनता से अपनी बात रखी है, लेकिन अब समय आ गया है कि हम अपनी सामाजिक और राजनीतिक हिस्सेदारी खुद तय करें। याचना नहीं, अब रण होगा, संघर्ष बड़ा भीषण होगा।”
युवाओं और महिलाओं को नेतृत्व का संदेश
ज्योति सोनी ने युवाओं से आगे आकर नेतृत्व संभालने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि केवल अनुयायी बनकर नहीं, बल्कि निर्णायक भूमिका निभाकर ही समाज आगे बढ़ सकता है।
साथ ही उन्होंने महिलाओं की भागीदारी को समाज के विकास की कुंजी बताते हुए शिक्षा, संगठन और आत्मनिर्भरता पर विशेष बल दिया।
अभूतपूर्व जनसमर्थन और संकल्प
महापंचायत में उमड़े जनसैलाब ने हाथ उठाकर ज्योति सोनी के नेतृत्व में एकजुटता का संकल्प लिया। इस आयोजन ने संकेत दे दिया कि आने वाले समय में स्वर्णकार समाज राजनीतिक और सामाजिक रूप से एक मजबूत शक्ति के रूप में उभर सकता है।

No comments:
Post a Comment