संतकबीरनगर। उप कृषि निदेशक डॉ. राकेश कुमार सिंह ने जनपद के किसानों से फसल अवशेष (पराली) न जलाने की अपील करते हुए कहा कि इससे पर्यावरण, मिट्टी की उर्वरता और मानव स्वास्थ्य पर गंभीर दुष्प्रभाव पड़ता है। पराली जलाने से मिट्टी में मौजूद लाभकारी सूक्ष्मजीव नष्ट हो जाते हैं, जिससे उत्पादन क्षमता घटती है।
उन्होंने बताया कि फसल अवशेष प्रबंधन के लिए कृषि विभाग द्वारा 50 से 80 प्रतिशत तक अनुदान पर सुपर सीडर, स्ट्रा रीपर, मल्चर, पैड़ी स्ट्रा चॉपर, रोटरी स्लेशर, रिवर्सिबल एमबी प्लाऊ, स्ट्रा रेक व बेलर जैसे यंत्र उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इनका उपयोग कर पराली को खाद के रूप में खेत में मिलाया जा सकता है या गौशालाओं, सीबीजी प्लांट और अन्य औद्योगिक इकाइयों को भेजा जा सकता है।
उप कृषि निदेशक ने कहा कि कंबाइन हार्वेस्टर के साथ फसल अवशेष प्रबंधन यंत्र का प्रयोग अनिवार्य है। ऐसा न करने पर हार्वेस्टर जब्त कर स्वामी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। साथ ही पराली को गोशालाओं में दान करने के लिए भी प्रेरित किया गया है।
उन्होंने जानकारी दी कि 1 अप्रैल से 19 अप्रैल 2026 के बीच जनपद में 723 पराली जलाने की घटनाएं सामने आई हैं, जिनका कृषि व राजस्व विभाग की संयुक्त टीम द्वारा सत्यापन किया जा रहा है। दोषी किसानों से 2500 से 15000 रुपये तक पर्यावरण क्षतिपूर्ति वसूली जाएगी तथा पुनरावृत्ति पर एफआईआर भी दर्ज की जाएगी।
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