गोरखपुर। संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से हेल्पलेस होप सोसायटी, गोरखपुर द्वारा इंदरपुर में उत्तर प्रदेश की समृद्ध लोक परंपराओं पर आधारित कार्यशाला एवं भव्य मंचीय प्रस्तुति का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में लोकगीत, लोकनृत्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की ऐसी छटा बिखरी कि पूरा वातावरण उत्सवमय हो उठा।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं गणेश वंदना के साथ हुआ। इसके पश्चात प्रकृति यादव एवं उनकी टीम ने आकर्षक नृत्य प्रस्तुत कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। रंग-बिरंगे परिधानों और पारंपरिक धुनों पर थिरकते कलाकारों ने लोक संस्कृति की जीवंत तस्वीर प्रस्तुत की।
मुख्य अतिथि आलोक रंजना वर्मा ने कहा कि भारत की लोक कला और संस्कृति हमारी पहचान है। उन्होंने लोक परंपराओं के संरक्षण की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं।
विशिष्ट अतिथि गन्ना समिति मुंडेरवा के चेयरमैन सुरेंद्र पाठक ने कहा कि संगीत और नृत्य न केवल मनोरंजन के साधन हैं, बल्कि स्वस्थ और संतुलित जीवन के लिए भी आवश्यक हैं। वहीं बृहस्पति कुमार पांडरी ने लोककलाओं को शिक्षा प्रणाली में शामिल करने की वकालत की।
अनुराग कुमार श्रीवास्तव ने पूर्वांचल की सांस्कृतिक विरासत पर प्रकाश डालते हुए कथक एवं दादरा नृत्य शैली की विशेषताओं को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि इन विधाओं में भारतीय परंपरा, भावनाएं और सामाजिक जीवन की झलक मिलती है।
अध्यक्ष स्कन्द कुमार चौरसिया ने बताया कि संस्था द्वारा ‘कल्चर फंक्शन प्रोडक्शन ग्रांट्स’ के अंतर्गत लोक कलाओं के संरक्षण एवं संवर्धन के उद्देश्य से इस प्रकार के आयोजन किए जा रहे हैं।
कार्यक्रम में फरुआही, अहिरवा, चैता और फाग जैसी पारंपरिक लोक विधाओं पर आधारित प्रस्तुतियों ने दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। कलाकारों के उत्साह और प्रस्तुति की उत्कृष्टता ने कार्यक्रम को यादगार बना दिया।
अंत में सभी अतिथियों को स्मृति चिन्ह एवं पुष्पगुच्छ भेंट कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में प्रकृति यादव, विवेक पाण्डेय, दिव्या मौर्या, सुजीत कुमार, अमन, आकाश, आदर्श, अविका, अंशु, अमीश कुमार, लक्ष्मी, संदीप कुमार एवं अश्वनी भारती सहित कई प्रतिभाशाली कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति से सभी का दिल जीत लिया।

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