वॉयस ऑफ बस्ती संवाददाता
बस्ती। डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती के अवसर पर स्वामी दयानंद विद्यालय में एक गरिमामय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ योगाचार्य गरुण ध्वज पाण्डेय द्वारा वैदिक यज्ञ एवं पूजन के साथ किया गया। यज्ञ के दौरान उन्होंने मंत्रोच्चार करते हुए राष्ट्र की सुख-समृद्धि एवं सामाजिक समरसता की कामना की।
इस अवसर पर मेष संक्रांति के महत्व पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने बताया कि बढ़ती गर्मी के मौसम में पाचन संबंधी समस्याओं से बचाव के लिए सतुआ का सेवन लाभकारी होता है, क्योंकि इसकी तासीर ठंडी होती है। उन्होंने कहा कि बाबा साहेब ने शिक्षा को “शेरनी का दूध” बताया था, जिसे पीकर व्यक्ति अन्याय के खिलाफ आवाज उठाना सीखता है। उनके विचार आज भी समाज को अंधविश्वासों से मुक्त कर न्यायपूर्ण दिशा प्रदान करते हैं।
विशिष्ट वक्ता के रूप में शिक्षक अनूप कुमार त्रिपाठी ने बाबा साहेब के संघर्षपूर्ण जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि अपमान और तिरस्कार सहने के बावजूद उन्होंने शिक्षा के बल पर जो ऊंचाई हासिल की, वह अदम्य साहस का उदाहरण है। उन्होंने ‘शिक्षित बनो, संघर्ष करो और संगठित रहो’ के मूल मंत्र को जीवन में अपनाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे प्रधानाध्यापक आदित्यनारायण गिरि ने कहा कि अंबेडकर जी केवल एक वर्ग के नेता नहीं, बल्कि महान विधिवेत्ता, अर्थशास्त्री और महिला अधिकारों के प्रबल समर्थक थे। उन्होंने विशेष रूप से दलित महिलाओं की शिक्षा पर जोर देकर समाज को सशक्त बनाने का मार्ग दिखाया।
इस अवसर पर अरविंद कुमार श्रीवास्तव, दिनेश मौर्य, नितीश कुमार, अंजली, अनीशा मिश्रा और स्वप्नल सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। सभी ने बाबा साहेब के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।

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