बस्ती। पूर्व आईएएस एवं मेधा संस्थापक स्व० लक्ष्मीकान्त शुक्ल की 73वीं जयंती पर मंगलवार को प्रेस क्लब सभागार में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने उनके शिक्षा सुधार, सामाजिक न्याय और जाति-मुक्त समाज के सपनों को याद किया।
मेधा प्रवक्ता दीन दयाल त्रिपाठी ने कहा कि लक्ष्मीकान्त शुक्ल ने छात्रों के लिए आर्थिक आधार पर शुल्क प्रतिपूर्ति और छात्रवृत्ति की व्यवस्था की परिकल्पना की थी। उन्होंने बताया कि सेवा काल में ही ‘जाति राज’ पुस्तक लिखने के कारण उन्हें तत्कालीन बसपा सरकार में उत्पीड़न का सामना करना पड़ा और उनकी पुस्तक पर प्रतिबंध लगा दिया गया। इसके बावजूद वे अपने सिद्धांतों पर अडिग रहे और शिक्षा के मुद्दों पर सड़क से लेकर सर्वोच्च न्यायालय तक संघर्ष करते रहे।
दीन दयाल तिवारी ने कहा कि यदि शुक्ल के सिद्धांतों और संकल्पों का दृढ़ता से पालन किया जाए तो कई सामाजिक समस्याओं का समाधान संभव है। उन्होंने बताया कि मेधा संस्था उनके सपनों को साकार करने के लिए लगातार प्रयासरत है।
कार्यक्रम में शिक्षा के बाजारीकरण और बढ़ती फीस पर भी चिंता व्यक्त की गई। वक्ताओं ने कहा कि हर वर्ष किताबों में बदलाव और रजिस्ट्रेशन फीस के नाम पर अभिभावकों का आर्थिक शोषण हो रहा है, जिसके खिलाफ मेधा लगातार संघर्ष कर रही है।
इस अवसर पर उमेश पाण्डेय ‘मुन्ना’, प्रदीप चन्द्र पाण्डेय, डॉ. वी.के. वर्मा, वृजेश दूबे, राहुल तिवारी, अंशू चौरसिया, राकेश पाण्डेय, विपुल सिंह, गिरीश चन्द्र गिरी, विजय पाण्डेय, जमील अहमद, रामरीका पाण्डेय, विपुल पाण्डेय और प्रतीक मिश्र सहित अनेक लोगों ने स्व० लक्ष्मीकान्त शुक्ल के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

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