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Monday, March 16, 2026

वैदिक परंपराओं पर लौटने की जरूरत - योगेश भारद्वाज


बस्ती। आर्य समाज गांधीनगर बस्ती के वार्षिकोत्सव में वैदिक चिंतक योगेश जी भारद्वाज ने कहा कि पशु, पक्षी और कीट-पतंगों में भी समझ होती है, इसलिए वे भोजन और सुरक्षा को साझा करते हैं, जैसे मधुमक्खियां सामूहिक रूप से कार्य करती हैं, लेकिन मनुष्य अक्सर ऐसा नहीं करता। उन्होंने कहा कि शिक्षा से ही समाज में समझदारी आती है। जब जनता शिक्षित होती है तो वह प्रजा बन जाती है, और प्रजा का अर्थ ही समझदार समाज से है। शिक्षित प्रजा का परिवार उन्नति करता है और बच्चे अपने माता-पिता के संस्कारों का अनुसरण करते हैं।
कार्यक्रम में कानपुर से आए वैदिक विद्वान रविंद्र आर्य ने कहा कि जिस परिवार में बड़े बुजुर्गों का सम्मान और सेवा होती है, वह परिवार निरंतर प्रगति करता है और सभी सदस्य सुखी रहते हैं। उन्होंने कहा कि आज के समय में परिवार के लोग एक-दूसरे से दूर होते जा रहे हैं और वाणी में संयम की कमी के कारण आपसी कटुता बढ़ रही है। पहले अतिथियों का आदर-सत्कार किया जाता था, लेकिन अब स्थिति बदल गई है। यदि कोई अतिथि घर आ जाता है तो लोग चाहते हैं कि वह जल्द से जल्द चला जाए। उन्होंने कहा कि समाज को फिर से पुरानी वैदिक परंपराओं की ओर लौटने की आवश्यकता है।
दिल्ली से आए भजनीक मुकेश शास्त्री ने अपने भजन “धर्म की राह से जो गुजर गए, जिंदगी का सुहाना सफर कर गए” प्रस्तुत कर उपस्थित लोगों को भावविभोर कर दिया।
कार्यक्रम में ओम प्रकाश आर्य, मुरलीधर भारती, प्रधान बृजेश आर्य, सत्येंद्र वर्मा, कार्यक्रम संचालक घनश्याम सिंह, गरुड़ध्वज पांडे, हरिहर मुनि, गिरजा शंकर दूबे, ओमप्रकाश लाल, सुमन आर्य, उमा श्रीवास्तव, रेखा श्रीवास्तव, संत मिलन, पंकज त्रिपाठी, सुभाष आर्य, धर्म प्रकाश उपाध्याय, परमात्मा विश्वास सहित सैकड़ों लोग उपस्थित रहे।

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