बस्ती। हर्रैया तहसील क्षेत्र के उभाई गांव की निवासी ज्ञानमती पत्नी स्वर्गीय सियाराम ने जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र देकर न्याय की गुहार लगाई है। उन्होंने आरोप लगाया है कि न्यायालय नायब तहसीलदार सदर हर्रैया द्वारा वाद संख्या 07671/2018 (सुखराम बनाम सियाराम) को पहले पैरवी के अभाव में खारिज कर दिया गया था, लेकिन बाद में बिना आपत्तिकर्ता को नोटिस और समन दिए दोबारा आदेश पारित कर दिया गया।
डीएम को दिए गए पत्र में ज्ञानमती ने बताया कि वह मौजा उभाई, तप्पा रामगढ़, परगना अमोढ़ा, तहसील हर्रैया, जिला बस्ती स्थित आराजी गाटा संख्या-657 रकबा 0.3290 हेक्टेयर की सहखातेदार संक्रमणीय भूमिधर हैं। उनके अनुसार गांव के ही सुखराम पुत्र जिलाजीत ने उनके पति सियाराम को दवा कराने के बहाने 26 नवंबर 2018 को रजिस्ट्री कार्यालय हर्रैया ले जाकर बैनामा करा लिया था।
ज्ञानमती ने बताया कि उक्त बैनामे के विरुद्ध उन्होंने सिविल जज (जू.डि.) की अदालत में मूलवाद संख्या 612/2025 ज्ञानमती बनाम सुखराम (दस्तावेज मंसूखी) दाखिल किया है, जो वर्तमान में विचाराधीन है। साथ ही तहसील हर्रैया में दाखिल खारिज वाद संख्या 07671/2018 में उन्होंने आपत्ति भी दाखिल की थी। इस मामले में नायब तहसीलदार सदर हर्रैया द्वारा 22 जून 2023 को पैरवी के अभाव में वाद खारिज कर दिया गया था और पत्रावली दफ्तर दाखिल हो गई थी।
पीड़िता का आरोप है कि बाद में वादी द्वारा कायमी प्रार्थना पत्र देकर बिना उन्हें नोटिस या समन दिए नायब तहसीलदार सदर हर्रैया से 27 फरवरी 2026 को आदेश पारित करा लिया गया।
ज्ञानमती ने बताया कि उनके छह बच्चे हैं, जिनमें पांच बेटियां और एक बेटा है। उक्त जमीन ही उनके परिवार के जीविकोपार्जन का एकमात्र साधन है। यदि विपक्षी द्वारा उस पर कब्जा कर लिया गया तो उनका परिवार संकट में आ जाएगा।
उन्होंने जिलाधिकारी से नायब तहसीलदार हर्रैया शौकत अली के खिलाफ आवश्यक कानूनी कार्रवाई करते हुए उक्त आदेश को निरस्त कराने की मांग की है।

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