गोरखपुर। सरस्वती शिशु मंदिर पक्कीबाग, गोरखपुर में भारतीय नववर्ष के पावन अवसर पर भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम, सम्मान समारोह एवं नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम उत्साह और गरिमा के साथ संपन्न हुआ। कार्यक्रम में शिक्षा जगत से जुड़े कई प्रमुख व्यक्तित्वों की उपस्थिति रही, जिन्होंने राष्ट्र निर्माण में शिक्षकों की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (गोरक्ष प्रांत) के प्रांत प्रचारक रमेश जी ने अपने संबोधन में कहा कि शिक्षक केवल पद से सेवानिवृत्त होता है, लेकिन उसके दायित्व जीवन भर बने रहते हैं। उन्होंने नवनियुक्त आचार्यों को प्रेरित करते हुए कहा कि वे भारत को जानें, समझें और उसकी गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाएं। उन्होंने शिक्षण कार्य को सर्वोच्च बताते हुए बच्चों में पारिवारिक संस्कारों के साथ राष्ट्रभक्ति की भावना विकसित करने पर जोर दिया और ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ की भावना को विश्व शांति का आधार बताया।
विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित राजा महेंद्र प्रताप सिंह विश्वविद्यालय, अलीगढ़ के पूर्व कुलपति प्रोफेसर चंद्रशेखर जी ने कहा कि देशभक्ति प्रत्येक कार्य का केंद्र होना चाहिए। उन्होंने सेवानिवृत्त आचार्यों के स्वस्थ एवं सुखद जीवन की कामना करते हुए नवनियुक्त शिक्षकों को उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।
कार्यक्रम के दौरान शिशु शिक्षा समिति के अंतर्गत संचालित विद्यालयों के चार प्रधानाचार्यों एवं 25 आचार्यों को उनकी दीर्घकालीन सेवाओं के लिए सम्मानित किया गया। वहीं, 80 नवनियुक्त आचार्यों को अतिथियों द्वारा नियुक्ति पत्र प्रदान कर उनके नए दायित्वों के लिए प्रेरित किया गया। इस अवसर पर विद्यार्थियों द्वारा भारतीय नववर्ष के उपलक्ष्य में मनमोहक सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ भी दी गईं, जिसने कार्यक्रम में उत्साह का संचार किया।
कार्यक्रम में अतिथियों का परिचय प्रधानाचार्य डॉ. राजेश सिंह ने कराया, जबकि आभार ज्ञापन प्रांतीय मंत्री डॉ. शैलेश कुमार सिंह ने व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन प्रतीक्षा जी द्वारा कुशलतापूर्वक किया गया। इस अवसर पर दक्षिण भाग प्रचारक मनीष जी, प्रांतीय अध्यक्ष प्रो. रामदरस राय, प्रदेश निरीक्षक राम सिंह, विद्यालय मंत्री संजय कुमार, कोषाध्यक्ष महेश गर्ग, डॉ. अश्वनी वर्मा, प्रदेश निरीक्षक (जन शिक्षा) जियालाल, कन्हैया चौबे सहित गोरक्ष प्रांत के विभिन्न विद्यालयों के प्रबंधक, प्रधानाचार्य एवं आचार्य बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

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