श्री सौरभ गर्ग, सचिव, सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय
सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (एमओएसपीआई) की ओर से नए आधार वर्ष 2022-23 पर आधारित जीडीपी आँकड़े जारी किए गए हैं। इन आंकड़ों से पता चलता है कि अर्थव्यवस्था ने संशोधित आधार के बावजूद मजबूत वृद्धि बनाए रखी है, जिसमें 2023-24 से 2025-26 के लिए औसत वास्तविक जीडीपी वृद्धि 7 प्रतिशत से अधिक और इसी अवधि के लिए औसत नाममात्र जीडीपी वृद्धि 9 प्रतिशत से अधिक रही है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए दूसरे उन्नत अनुमानों के अनुसार, वास्तविक जीडीपी 7.6 प्रतिशत बढ़ा है, जबकि नाममात्र जीडीपी 8.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज कर रहा है।
इन आँकड़ों का महत्व तब और भी ज़्यादा साफ़ हो जाता है, जब इन्हें अनेक तरीकों में बदलाव और आधार वर्ष संशोधन के दौरान अपनाए गए नए डेटा स्रोतों की पृष्ठभूमि में देखा जाता है। अन्य के अलावा, अपस्फीति या डिफ्लेशन की अधिक परिष्कृत विधियों को अपनाए जाने तथा वार्षिक सर्वेक्षण के निष्कर्षों और व्यापक प्रशासनिक डेटा सेट जैसे समृद्ध डेटा स्रोतों के समावेश- ने अर्थव्यवस्था की बदलती प्रवृत्तियों को और स्पष्ट रूप से समझने में मदद की है। यह बात भारत की जीडीपी पद्धति में बड़े पैमाने पर दिलचस्पी को देखते हुए भी मायने रखती है, जिसने अक्सर अर्थव्यवस्था के प्रदर्शन पर चर्चा को बढ़ावा दिया है।
संशोधित जीडीपी आँकड़े केवल सांख्यिकीय संख्याएँ नहीं दर्शाते; बल्कि खामोशी से यह भी दर्शाते हैं कि विभिन्न सरकारी पहलें विकसित भारत@2047 के व्यापक विजन को आगे बढ़ाते हुए नीतियों को किस प्रकार ठोस क्षेत्रीय परिणामों में तब्दील कर रही हैं।
विनिर्माण क्षेत्र ने वर्ष 2023-24 से 2025-26 के बीच औसतन 11 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है, जो इस बात का स्पष्ट उदाहरण है कि डबल डिफ्लेशन के उपयोग और नए डेटा स्रोतों को अपनाने जैसी परिष्कृत पद्धतियों ने किस प्रकार इस क्षेत्र की वास्तविक गति को बेहतर ढंग से समझने में सक्षम बनाया है। यह ऐसी गति है, जिसको सरकार उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना सहित विभिन्न योजनाओं के जरिए सक्रिय रूप से बढ़ावा दे रही है।
नई श्रृंखला में, मूल्य संवर्धन में कृषि के योगदान में वृद्धि मुख्यतः डीजल के उपयोग में कमी तथा ज्यादा कीमत वाले फलों एवं सब्जियों के योगदान को शामिल किए जाने के कारण हुई है। ये सकारात्मक संकेत हैं, जो लागत का दबाव कम होने, सरकार के प्रोत्साहन के कारण किसानों द्वारा सौर ऊर्जा को अपनाए जाने और उच्च मूल्य वर्द्धित कृषि की ओर नीति-प्रेरित बदलाव को दर्शाते हैं। इससे खेती की लाभप्रदता मजबूत होती है और किसानों की आय में सुधार होता है।
असंगठित क्षेत्र के उद्यमों के वार्षिक सर्वेक्षण (एएसयूएसई) और आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (पीएलएफएस) जैसे नए सर्वेक्षण डेटा के उपयोग ने मुख्य रूप से अनौपचारिक क्षेत्र प्रधान सेवा क्षेत्रों, जैसे व्यापार, परिवहन और अन्य सेवाओं में जीडीपी अनुमान को नया रूप दिया है। पहले इन उद्यमों के लिए गणनाएँ सीधे आँकड़ों के बजाय बेंचमार्क आधारित अनुमानों पर निर्भर करती थीं।
उदाहरण के लिए, व्यापार, होटलों, परिवहन और संचार उप-क्षेत्र ने 2023-24 से 2025-26 के तीन वर्षों में औसतन 9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की। आंशिक रूप से यह बेहतर डेटा उपयोग का परिणाम है, क्योंकि एएसयूएसई और पीएलएफएस जैसे सर्वेक्षण मौजूदा रुझानों को उजागर करते हुए अब अनौपचारिक क्षेत्र और श्रमिकों की उत्पादकता को स्पष्ट रूप से देखने में सक्षम बनाते हैं। इसी तरह, अद्यतन डेटा स्रोतों के उपयोग ने आवासीय संपत्तियों के स्वामित्व में वृद्धि को दर्ज किया है, जो सरकार की किफायती आवास योजनाओं के सकारात्मक परिणामों को दर्शाता है।
जीडीपी अनुमान नए डिजिटल डेटा स्रोतों से लाभान्वित हुआ है, जिनमें से अनेक को ‘डिजिटल इंडिया’ जैसी सरकारी पहल के माध्यम से अधिक सुलभ बनाया गया है। ई-वाहन, एमजीटी-7 कॉर्पोरेट रिटर्न, जीएसटी डेटा और सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (पीएफएमएस) जैसे डेटाबेस अब सीधे राष्ट्रीय खातों में योगदान दे रहे हैं। जीएसटी डेटा ने विशेष रूप से त्रैमासिक अनुमानों को और सटीक बनाया है और यह राज्यवार आवंटन में सुधार करेगा । इसका परिणाम अधिक मजबूत और आंतरिक रूप से संगत जीडीपी अनुमान प्रणाली के रूप में सामने आया है। यह संपूर्ण सरकार के दृष्टिकोण को भी दर्शाता है, जिसमें जीडीपी अनुमानों की सटीकता बढ़ाने के लिए प्रशासनिक डेटा का नए तरीकों से उपयोग किया जा रहा है।
केवल जीडीपी के लिए ही नहीं, बल्कि मंत्रालय देशभर में साक्ष्यों के आधार पर निर्णय लेने के लिए प्रशासनिक डेटा के उपयोग को बढ़ावा देने हेतु वातावरण तैयार करने के व्यापक लक्ष्य को भी आगे बढ़ा रहा है। इसके मुख्य प्रयास राज्यों के साथ करीबी तालमेल सहित डेटा की गुणवत्ता, तुलनीयता और अंतः क्रियाशीलता को सुधारने पर केंद्रित हैं, ताकि राष्ट्रीय और उप-राष्ट्रीय दोनों स्तरों पर डेटा का सुसंगत और प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।
डेटा-आधारित निर्णय लेने के इस दौर में, स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं को समझने और लक्षित नीतियों का मार्गदर्शन करने के लिए उप-राष्ट्रीय डेटा बेहद महत्वपूर्ण है। इसी कारण राज्यों और जिलों के स्तर पर जीडीपी के ठोस अनुमान पर अधिक ध्यान दिया जा रहा है,जिसके लिए राज्यों को तकनीकी सहायता पहले ही प्रदान की जा चुकी है। इसके अलावा, वर्तमान नमूना सर्वेक्षणों में ऐसे प्रावधान किए गए हैं, जिनसे राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा जिला-स्तरीय अनुमान तैयार किए जा सकें । एएसयूएसई और पीएलएफएस के तहत ये मजबूत उप-राज्य स्तरीय सर्वेक्षण अनुमान उप-राष्ट्रीय स्तर पर अर्थव्यवस्था का अधिक विस्तृत और व्यापक दृष्टिकोण प्रदान करते हुए राज्यों/उप-राज्य जीडीपी माप की सटीकता को और अधिक मजबूती प्रदान करेंगे।
आधार वर्ष संशोधन ने कई सुधार लाकर और हमारी सांख्यिकीय प्रणाली की नींव को मजबूती प्रदान करते हुए आवश्यक आधार तैयार किया है। इसके बावजूद, यह केवल एक परिवर्तनकारी यात्रा की शुरुआत है, क्योंकि यह प्रणाली नए सांख्यिकीय उत्पादों और प्रशासनिक डेटा सेट्स के सामंजस्य जैसी आगामी पहलों के माध्यम से विकसित हो रही है। ये सभी प्रयास मिलकर नीति निर्माताओं को समय पर, विश्वसनीय और क्रियान्वयन योग्य जानकारी प्रदान कर गतिशील, उत्तरदायी और भविष्योन्मुख सांख्यिकीय प्रणाली के विकास को आगे बढ़ा रहे हैं।
(सौरभ गर्ग, सचिव, सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय हैं। व्यक्त किए गए विचार व्यक्तिगत हैं। )

No comments:
Post a Comment