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Friday, March 6, 2026

सार्वजनिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाना: किफायती और गुणवत्तापूर्ण जेनेरिक दवाओं के लिए जनऔषधि परियोजना का रणनीतिक विकास

– Jagat Prakash Nadda, केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन एवं उर्वरक मंत्री

“जन औषधि सस्ती भी, भरोसेमंद भी – सेहत की बात, बचत के साथ।”


किसी राष्ट्र की प्रगति का वास्तविक आकलन इस बात से किया जाता है कि उसके नागरिकों को स्वास्थ्य सेवाओं जैसी बुनियादी सुविधाएँ कितनी सहजता से उपलब्ध हैं। लंबे समय तक भारत में लाखों लोगों के लिए दवाओं की ऊँची कीमत एक बड़ी आर्थिक बाधा रही है। इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना को Narendra Modi के नेतृत्व में शुरू किया गया। इस योजना का उद्देश्य गुणवत्तापूर्ण जेनेरिक दवाओं को ब्रांडेड दवाओं की तुलना में काफी कम कीमत पर उपलब्ध कराना है।

विश्व स्तर पर जेनेरिक दवाएँ सुलभ स्वास्थ्य सेवाओं की आधारशिला मानी जाती हैं। दुनिया भर में चिकित्सकों द्वारा लिखी जाने वाली लगभग 80 से 90 प्रतिशत दवाएँ जेनेरिक होती हैं। इन दवाओं की पैकेजिंग या लेबलिंग भले अलग हो सकती है, लेकिन उनकी गुणवत्ता, प्रभावशीलता, सुरक्षा और खुराक ब्रांडेड दवाओं के समान होती है।

यह परियोजना केवल दवाओं की बिक्री तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है। देशभर में 18,000 से अधिक जनऔषधि केंद्रों के माध्यम से दवाइयाँ बाजार मूल्य से 50 से 80 प्रतिशत तक सस्ती उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे सभी सामाजिक और आर्थिक वर्गों के लोगों को लाभ मिल रहा है।

जनऔषधि योजना के अंतर्गत वर्तमान में 2,110 प्रकार की दवाएँ और 315 सर्जिकल उत्पाद उपलब्ध हैं, जो 29 विभिन्न चिकित्सीय श्रेणियों को कवर करते हैं। इस पूरी व्यवस्था की निगरानी Pharmaceuticals & Medical Devices Bureau of India द्वारा की जाती है, जो बाजार की आवश्यकताओं और विशेषज्ञों की सलाह के आधार पर उत्पाद सूची का लगातार विस्तार करता है।

भारतीय दवा उद्योग आज विश्व के 200 से अधिक देशों में दवाओं की आपूर्ति कर रहा है, जिनमें अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोपीय संघ जैसे सख्त मानकों वाले देश भी शामिल हैं। इसके साथ ही भारतीय कंपनियाँ बायोसिमिलर और जटिल जेनेरिक दवाओं के क्षेत्र में अनुसंधान और विकास पर भी तेजी से निवेश कर रही हैं।

कई बार यह भ्रम फैलाया जाता है कि सस्ती दवाएँ गुणवत्ता में कमजोर होती हैं, लेकिन जनऔषधि परियोजना ने इस मिथक को पूरी तरह तोड़ दिया है। इन दवाओं का निर्माण डब्ल्यूएचओ-जीएमपी प्रमाणित कंपनियों द्वारा किया जाता है और हर बैच को National Accreditation Board for Testing and Calibration Laboratories से मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं में परीक्षण के बाद ही बाजार में भेजा जाता है।

साथ ही, देशभर में पाँच आधुनिक भंडार गृह और 41 विशेष वितरकों के माध्यम से एक मजबूत आईटी आधारित आपूर्ति प्रणाली विकसित की गई है, जिससे दवाओं की उपलब्धता लगातार सुनिश्चित रहती है।

पहुँच, गुणवत्ता और सस्ती कीमत—इन तीन स्तंभों पर आधारित यह योजना लाखों परिवारों के चिकित्सा खर्च को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। निरंतर संस्थागत सहयोग और बढ़ती जन-जागरूकता के साथ अब हर जिले में जनऔषधि केंद्र स्थापित करने का लक्ष्य भी तेजी से साकार हो रहा है।

Viksit Bharat @2047 की परिकल्पना के अंतर्गत सरकार का उद्देश्य एक ऐसी स्वास्थ्य व्यवस्था विकसित करना है, जिसमें सभी नागरिकों को बेहतर अस्पताल, सस्ती दवाएँ और आसान उपचार उपलब्ध हो सके। प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व में सरकार इस दिशा में लगातार प्रयासरत है, ताकि किफायती स्वास्थ्य सेवा का यह मॉडल पूरे विश्व के लिए प्रेरणा बन सके।

(लेखक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन एवं उर्वरक मंत्री हैं।)

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