बस्ती। नारायण सेवा संस्थान ट्रस्ट के तत्वावधान में दुबौलिया बाजार स्थित राम विवाह मैदान में आयोजित 9 दिवसीय संगीतमयी श्रीराम कथा के छठवें दिन कथा व्यास स्वामी स्वरूपानन्द जी महाराज ने भगवान श्रीराम और माता सीता के विवाह प्रसंग का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन किया।
उन्होंने कहा कि श्रीरामचरितमानस में महाकवि गोस्वामी तुलसीदास द्वारा वर्णित राम-सीता विवाह केवल एक पारिवारिक संस्कार नहीं, बल्कि जीवन के बड़े संघर्षों से पहले धैर्य, संयम और मर्यादा धारण करने की प्रेरणा है। वनवास और रावण जैसे अहंकारी असुर के वध से पूर्व यह प्रसंग धैर्यवरण का संदेश देता है।
कथा के दौरान श्रीराम, लक्ष्मण और माता सीता के स्वरूप में सजे बालकों की झांकियों ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। कथा व्यास ने श्रीराम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न के नामकरण से लेकर यज्ञ रक्षा हेतु विश्वामित्र के साथ वनगमन तक के प्रसंगों का विस्तार से वर्णन किया।
उन्होंने बताया कि राजा दशरथ प्रारंभ में श्रीराम को विश्वामित्र के साथ भेजने के लिए तैयार नहीं थे, लेकिन गुरु वशिष्ठ के समझाने पर उन्होंने गुरु आज्ञा को शिरोधार्य किया। इससे यह शिक्षा मिलती है कि जीवन में गुरु का मार्गदर्शन सर्वोपरि होता है।
स्वामी जी ने कहा कि जीवन में मधुरता और सद्गुण ही व्यक्ति को ईश्वर का प्रिय बनाते हैं। उन्होंने ‘मान दान’ को द्रव्य दान से श्रेष्ठ बताते हुए कहा कि सच्ची सेवा सम्मान और विनम्रता में निहित है।
उन्होंने यह भी कहा कि भगवान श्रीराम का धनुष ज्ञान और बाण विवेक का प्रतीक है। मनुष्य को सदैव ज्ञान और विवेक से सज्जित रहना चाहिए, क्योंकि विकार रूपी राक्षस कभी भी जीवन में विघ्न उत्पन्न कर सकते हैं।
धनुष भंग से लेकर राम विवाह तक के प्रसंगों का रोचक वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि यह विवाह लोककल्याण के उद्देश्य से हुआ था और आज भी समाज को मर्यादा, प्रेम और धैर्य का संदेश देता है।
कार्यक्रम में मुख्य यजमान संजीव सिंह द्वारा कथा व्यास का विधि-विधान से पूजन किया गया। आयोजन में बाबूराम सिंह, अनिल सिंह, ज्ञानेंद्र पांडे (पूर्व अध्यक्ष, कांग्रेस पार्टी बस्ती), गंगा प्रसाद मिश्रा, रफीक खान, शिवनारायण पांडे, नर्वदेश्वर शुक्ला, कृष्ण दत्त दूबे, सुनील पांडे, जीत बहादुर सिंह, जगदम्बा पांडे, हीरा सिंह (पूर्व प्रधान), हरिओम पांडे, सभाजीत चौधरी, नंदकिशोर पांडे, सुनील सिंह, अनूप सिंह, जसवंत सिंह, अजय सिंह, अरुण सिंह, सत्यनारायण द्विवेदी, राजेश सिंह, दयाराम, नीरज, गोरखनाथ सोनी, विभा सिंह, इंद्रपरी सिंह, महिमा सिंह, शीला सिंह, रिंकी सिंह, मुस्कान सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कथा का श्रवण किया।

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