बस्ती । रविवार को प्रेस क्लब सभागार में भारतीय मछुआरा महासंघ का सम्मेलन आर.डी. निषाद के संयोजन में किया गया। सम्मेलन में मछुआरा समाज के सामाजिक, राजनीतिक, शैक्षणिक, आर्थिक स्थिति पर विमर्श के साथ ही पदाधिकारी घोषित किये गये। सर्व सम्मत से संदीप निषाद जिलाध्यक्ष, राहुल निषाद महासचिव और शत्रुघ्न निषाद को आडीटर का दायित्व सौंपा गया। मुख्य अतिथि के रूप में सम्मेलन को सम्बोधित करते हुये पूर्व मंत्री और मछुआरा महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष शंखलाल माझी ने कहा कि निषाद जाति का इतिहास अत्यंत प्राचीन और गौरवशाली है किन्तु उनका वर्तमान बहुत चुनौतीपूर्ण है। कहा कि लम्बे संघर्ष के बाद निषाद समाज को जो अधिकार दिये गये थे उसे एक-एक कर छीना जा रहा है। यदि नई पीढी जागरूक न हुई तो चुनौतियां और बढ जायेंगी।
पूर्व मंत्री शंखलाल माझी ने कहा कि निषादों का इतिहास जल और वन से जुड़ा है, जो उन्हें प्रकृति प्रेमी और साहसी योद्धा के रूप में स्थापित करता है। निषाद राज को मर्यादा पुरूषोत्तम श्रीराम ने भरत के समान भाई का आदर दिया किन्तु अब वे घोर उपेक्षा के शिकार हैं। कहा कि अधिकारों को हासिल करने के लिये मछुआरा समाज को एकजुट होकर आगे बढना होगा।
कार्यक्रम संयोजक आर.डी. निषाद ने कहा कि निषाद समुदाय का संबंध राजा वेन, पृथु और निषादराज गुह जैसे ऐतिहासिक राजाओं से जोड़ा जाता है। निषाद परंपरागत रूप से नदी-नालों पर आश्रित समुदाय हैं, जिसमें मछली पकड़ना, नाविक (नाव चलाना), रेत की खुदाई और जल-परिवहन मुख्य पेशा रहा है। किन्तु नये सन्दर्भो में सरकार ने उन्हें हाशिये पर छोड़ दिया है। कहा कि एकजुटता से ही लक्ष्य हासिल हांेगे।
भारतीय मछुआरा महासंघ के सम्मेलन को रामकेवल निषाद, रविकान्त निषाद, अजय निषाद, बब्लू निषाद, कानिक राम निषाद, सतिराम निषाद आदि ने सम्बोधित करते हुये मछुआरा समाज की चुनौतियों, कुरीतयों पर प्रकाश डालते हुये कहा कि शिक्षा के द्वारा ही लक्ष्य हासिल होंगे। कहा कि अपने बच्चों को अनिवार्य रूप से शिक्षित करें।
कार्यक्रम मुख्य रूप से पटेश्वरी निषाद, प्रेमचन्द निषाद, गब्बर निषाद, रामचरन निषाद, फूलचंद निषाद, अनिल यादव, गुरू प्रसाद निषाद, विफई निषाद, भगवत निषाद, संजय निषाद, शुभम चौधरी, सुल्तान, नन्दलाल निषाद, कृष्णा प्रसाद निषाद, गुरूदीन निषाद, दिलीप कुमार निषाद, श्यामलाल निषाद, गंगाराम निषाद, राम विलास निषाद, अनिल कुमार निषाद, विनोद कुमार निषाद, रमेश निषाद, रामअचल निषाद, अवधेश निषाद, शोभानाथ निषाद, दयाराम निषाद के साथ ही बड़ी संख्या में मछुआरा समाज और विभिन्न सामाजिक संगठनों के पदाधिकारी, सदस्य शामिल रहे।
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