गोरखपुर। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने संसद में जानकारी देते हुए बताया कि भारतीय रेलवे की स्वदेशी स्वचालित ट्रेन सुरक्षा (एटीपी) प्रणाली ‘कवच’ एक अत्यंत जटिल तकनीक है, जिसमें ऑप्टिकल फाइबर केबल, टेलीकॉम टावर, स्टेशन डेटा सेंटर, ट्रैकसाइड इक्विपमेंट और लोकोमोटिव पर लगाए जाने वाले ऑनबोर्ड सिस्टम सहित पाँच प्रमुख सबसिस्टम शामिल हैं।
रेल मंत्री के अनुसार अब तक देशभर में कवच के तहत 8,570 किमी ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछाई जा चुकी है, लगभग 1,100 टेलीकॉम टावर लगाए जा चुके हैं, 767 स्टेशनों पर स्टेशन डेटा सेंटर स्थापित किए जा चुके हैं, 6,776 किमी ट्रैकसाइड इक्विपमेंट लगाए जा चुके हैं तथा 4,154 किमी तक चलने वाले लोकोमोटिव में कवच सिस्टम लगाया जा चुका है।
उन्होंने बताया कि व्यापक विकास और परीक्षण के बाद जुलाई 2024 में इस प्रणाली को अंतिम डिज़ाइन स्वीकृति मिली। कवच का विकास वर्ष 2016 में शुरू हुआ, 2019 में इसका पहला संस्करण लॉन्च किया गया और 2014 के बाद से इसके विस्तार में तेज़ी आई है। उन्होंने कहा कि इस सुरक्षा तकनीक के तेजी से विस्तार को वैश्विक स्तर पर भी पहचान मिल रही है।
रेल मंत्रालय द्वारा पूर्वोत्तर रेलवे के 1,441 रूट किमी पर कवच प्रणाली लगाने का कार्य 492.21 करोड़ रुपये की लागत से स्वीकृत किया जा चुका है। इसके तहत लखनऊ, वाराणसी और इज्जतनगर मंडलों के कई महत्वपूर्ण रेलखंडों पर कवच लगाया जाएगा।
पहले चरण में 558 रूट किमी पर कवच प्रणाली स्थापित की जाएगी। इसमें लखनऊ मंडल के सीतापुर सिटी–बुढ़वल जंक्शन, बुढ़वल जंक्शन–गोरखपुर कैंट, मानक नगर–लखनऊ जंक्शन–मल्हौर तथा बाराबंकी–बुढ़वल जंक्शन और वाराणसी मंडल के गोरखपुर कैंट–गोल्डिनगंज रेलखंड शामिल हैं।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार कवच स्थापना के लिए टॉवर और उपकरण से संबंधित दो अलग-अलग निविदाओं के माध्यम से कार्य कराया जाएगा। वर्तमान में मुख्य मार्ग छपरा–बाराबंकी रेलखंड पर टॉवर लगाने का कार्य प्रगति पर है, जबकि गोरखपुर कैंट–छपरा ग्रामीण खंड में टॉवर लगाने के लिए निविदा जारी की जा चुकी है। कवच उपकरण लगाने की निविदा प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और इसके लिए सर्वे का कार्य जारी है।
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