बस्ती। जनपद की जीवनरेखा मानी जाने वाली पौराणिक महत्व की मनोरमा नदी की सफाई को लेकर प्रशासनिक उदासीनता पर अब सवाल उठने लगे हैं। सामाजिक कार्यकर्ता एवं भाजपा नेता चन्द्रमणि पाण्डेय सुदामाजी ने जिलाधिकारी को संबोधित ज्ञापन प्रशासनिक अधिकारी को सौंपते हुए इस मुद्दे पर प्रशासन की मंशा स्पष्ट करने की मांग की है।
उन्होंने बताया कि 5 फरवरी 2026 को दिए गए मांगपत्र और 18 फरवरी को भेजे गए अनुस्मारक के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्ययोजना सामने नहीं आई है। जबकि 5 व 6 मार्च को हुए धरने के बाद 9 मार्च को कलेक्ट्रेट सभागार में डीसी मनरेगा व सिंचाई विभाग के अधिकारियों के साथ हुई बैठक में निर्णय लिया गया था कि 26 मार्च को आयोजित रामनवमी मेले को देखते हुए मखौड़ा धाम, शिवाला घाट, तपसीधाम, झुंगीनाथ और पंडूलघाट सहित लगभग 10 से 12 किलोमीटर क्षेत्र में सफाई कराई जाएगी।
चन्द्रमणि पाण्डेय सुदामाजी ने कहा कि मनोरमा नदी के प्रदूषण से करीब 300 गांवों की लाखों आबादी प्रभावित हो रही है। भूमिगत जल तक दूषित हो चुका है, जिससे जनस्वास्थ्य पर गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
उन्होंने बताया कि जनसहयोग से मखौड़ा धाम में लगभग 500 मीटर क्षेत्र की सफाई स्वयंसेवकों द्वारा की जा चुकी है। अब 18 मार्च से पंडूलघाट स्थित झुंगीनाथ मंदिर के पास पांच दिवसीय विशेष सफाई अभियान शुरू किया जाएगा।
इस दौरान उन्होंने प्रशासन से सवाल उठाए कि क्या इस जनअभियान में सहयोग और सुरक्षा व्यवस्था दी जाएगी, क्या मनरेगा, सिंचाई विभाग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड व अन्य एजेंसियों के माध्यम से सफाई कार्य शुरू होगा, और यदि होगा तो कब से।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन सक्रिय नहीं हुआ तो जनसहयोग से आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा तथा आवश्यकता पड़ने पर मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री से मुलाकात के साथ न्यायालय का भी दरवाजा खटखटाया जाएगा।
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