कानपुर। आपका सिमकार्ड ई-सिम में बदल रहा...मैसेज भेजने के बाद कारोबारी का मोबाइल हैंग कर खाते से 1.28 करोड़ रुपये की ठगी करने के एक आरोपित को साइबर क्राइम टीम ने मेरठ से गिरफ्तार किया।
गिरोह के सरगना मेराज समेत अन्य सदस्य फरार हैं, जिनकी तलाश में टीम मुंबई दबिश देने पहुंची है। साइबर अपराधियों ने ठगी की रकम से 54 लाख का नोएडा की नामचीन कंपनी से दो घंटे के भीतर सोना खरीदा और उसका भुगतान सोना लेने से पहले आनलाइन किया था।
कारोबारी के 1.26 करोड़ रुपये फ्रीज कर दिए हैं। साइबर ठग ने तीन अलग-अलग नामों से कूटरचित पैनकार्ड, आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र बना रखे थे, जिनके आधार पर वह बैंक खाते खुलवा ठगी करता था। साइबर टीम ने आरोपित को मंगलवार को जेल भेज दिया।
अशोक नगर निवासी लाजिस्टिक कारोबारी मोकम सिंह गुरुद्वारा भाई बन्नो साहिब प्रबंधन समिति के पूर्व प्रधान हैं। उनके मुताबिक बीती 23 अगस्त की रात वाट्सएप पर पीएम किसान योजना, आरटीओ चालान, केनरा बैंक, आधार अपडेट समेत कई योजनाओं के नाम की एपीके फाइल आई थी।
उसी रात मोबाइल फोन पर एयरटेल कंपनी का सिम बदलने का मैसेज आया। उसमें लिखा था कि आपका सिमकार्ड बदलने का आदेश हुआ है। अगर सिम नहीं बदलना चाहते हैं तो नो सिम लिखकर 121 पर मैसेज कर दें। उन्होंने मैसेज कर दिया। अगले दिन 24 अगस्त की दोपहर सिमकार्ड का नेटवर्क चला गया।
बेटा हरदीप 25 अगस्त की सुबह स्टोर पहुंचा तो पता चला कि एयरटेल कंपनी से कोई सिम बदलने का मैसेज नहीं भेजा गया। इसके बाद बैंक जाने पर पता चला कि सोमवार सुबह पिता के बैंक खाते से 1.28 करोड़ रुपये निकले हैं।
उन्होंने आनलाइन साइबर सेल में शिकायत की और 26 अगस्त 2025 को साइबर क्राइम थाने में मुकदमा कराया था। डीसीपी क्राइम श्रवण कुमार सिंह ने बताया कि जिस खाते में रुपये पहुंचे थे, वह मुंबई के बांद्रा वेस्ट निवासी अमर तिवारी की अमर कलेक्शन फर्म के नाम से खाता खुला था।
साइबर सेल ने ठगी की रकम में 72.50 लाख रुपये फ्रीज करा दिए, जबकि 54 लाख रुपये उसी सुबह नोएडा की एमएमटीसी-पैंप कंपनी के खाते में ट्रांसफर हुए थे, जिससे सोना खरीदा गया था। साइबर टीम ने कंपनी में संपर्क किया और फुटेज निकलवाए। कंपनी ने सोना बेचने और उसका बिल भी दिखाया।
कंपनी ने भी नोएडा में आरोपित पर मुकदमा कराया। मामले में वादी भी हाईकोर्ट पहुंचा, जिसके बाद वह रकम भी फ्रीज हो गई लेकिन ठग नहीं मिला। आरोपित की फुटेज मिलने के बाद अमर कलेक्शन नाम से खाते में दिए पते पर टीम मुंबई पहुंची तो पता फर्जी था।
खाते में दिए मोबाइल नंबर के जरिए आइपी एड्रेस जांचा गया और उसकी मदद से मेरठ के नौचंदी थाना क्षेत्र के गली नंबर सात करीब नगर के पते पर टीम पहुंच गई, जहां अरशद अंसारी मिला। उसने ही अपने अमर तिवारी बनकर ठगी की थी।
- कंपनी की संलिप्तता की भी जांच कर रही साइबर टीम
डीसीपी क्राइम श्रवण कुमार ने बताया कि एमएमटीसी-पैंप कंपनी से अमर कलेक्शन ने सोना खरीदा था। ठग ने अपनी फर्म कपड़े की दिखाई थी। ऐसे में कंपनी को उसके बारे में जांच करनी चाहिए।
न तो उस फर्म का टर्नओवर इतना था और न ही इनकम टैक्स रिटर्न उस स्तर का था। कंपनी की जांच की जा रही है। वहीं, मुकदमे के वादी मोकम सिंह ने भी कंपनी की संलिप्तता पर सवाल उठाते हुए उसके खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
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