वॉयस ऑफ बस्ती संवाददाता
नई दिल्ली। राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्य मंत्री रवनीत सिंह ने बताया कि नाशवान कृषि उत्पादों सहित खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के समग्र विकास को केंद्र सरकार प्राथमिकता दे रही है। खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय (MoFPI) अपनी प्रमुख योजनाओं—प्रधान मंत्री किसान संपदा योजना, उत्पादन लिंक प्रोत्साहन योजना खाद्य प्रसंस्करण तथा प्रधान मंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम औपचारिकीकरण योजना—के माध्यम से पूर्वी उत्तर प्रदेश सहित पूरे देश में अवसंरचना सुदृढ़ीकरण को बढ़ावा दे रहा है।
मंत्री ने बताया कि पीएम किसान संपदा योजना वर्ष 2025-26 तक लागू है और 15वें वित्त आयोग चक्र के लिए इसका कुल परिव्यय 6,520 करोड़ रुपये है। 31 दिसंबर 2025 तक उत्तर प्रदेश में इस योजना के अंतर्गत 72 खाद्य प्रसंस्करण परियोजनाओं को स्वीकृति दी जा चुकी है। इस योजना के तहत उद्यमियों को खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना हेतु वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।
उत्पादन लिंक प्रोत्साहन योजना (PLISFPI) वर्ष 2021-22 से 2026-27 तक 10,900 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ लागू है। इसका उद्देश्य वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी भारतीय खाद्य विनिर्माण कंपनियों का निर्माण करना तथा अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय ब्रांडों को बढ़ावा देना है। 31 दिसंबर 2025 तक उत्तर प्रदेश में 26 स्थानों पर प्रस्तावों को मंजूरी दी जा चुकी है।
प्रधान मंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम (PMFME) योजना वर्ष 2025-26 तक 10,000 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ संचालित है। इसके अंतर्गत सूक्ष्म इकाइयों को वित्तीय, तकनीकी और व्यावसायिक सहायता प्रदान की जाती है। 31 दिसंबर 2025 तक उत्तर प्रदेश में 22,060 सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को सहायता के लिए स्वीकृति दी जा चुकी है।
मंत्रालय इन योजनाओं के तहत प्राथमिक प्रसंस्करण सुविधाएं, संग्रह केंद्र, रेफ्रिजरेटेड वैन सहित कृषि-स्तरीय अवसंरचना के विकास को प्रोत्साहित कर रहा है। इन पहलों का उद्देश्य खेत से खुदरा बाजार तक आधुनिक आपूर्ति श्रृंखला का निर्माण, भंडारण व परिवहन क्षमता में सुधार, कृषि उपज की बर्बादी में कमी और मूल्यवर्धन को बढ़ावा देना है।
सड़क और रेल संपर्क में सुधार से खेतों, संग्रहण केंद्रों और प्रसंस्करण इकाइयों के बीच पहुंच सुगम हुई है, जिससे नाशवान वस्तुओं के खराब होने का जोखिम कम हुआ है और वितरण दक्षता में वृद्धि हुई है।
कुल मिलाकर, केंद्र सरकार की ये पहलें उत्तर प्रदेश सहित देशभर में खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को नई मजबूती प्रदान कर रही हैं और किसानों की आय वृद्धि की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

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