बस्ती। जिला अस्पताल में आयुष चिकित्साधिकारी एवं वरिष्ठ होम्योपैथ चिकित्सक डा. वी.के. वर्मा ने अयोध्या में आयोजित राष्ट्रीय होम्योपैथिक सेमिनार में गुर्दे की बीमारी में होम्योपैथी की उपयोगिता विषय पर शोध पत्र प्रस्तुत किया। उनके शोध कार्य की सराहना करते हुए अतिथियों ने उन्हें स्मृति चिन्ह एवं प्रमाण-पत्र भेंटकर सम्मानित किया।
अपने शोध पत्र में डा. वर्मा ने बताया कि गुर्दे (किडनी) की बीमारियों के उपचार में होम्योपैथी पद्धति के अंतर्गत बर्बेरिस वल्गारिस (पथरी), कैंथारिस (जलन) तथा लायकोपोडियम (क्रोनिक समस्याएं) जैसी प्रभावी औषधियां उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि किडनी स्टोन, उच्च क्रिएटिनिन, यूरिक एसिड तथा मूत्र संक्रमण जैसी समस्याओं में लक्षणों के आधार पर दवा का चयन किया जाता है। उचित उपचार के लिए विशेषज्ञ होम्योपैथ से परामर्श आवश्यक है।
उन्होंने बताया कि किडनी की दीर्घकालिक बीमारी तब विकसित होती है जब कोई रोग या स्थिति लंबे समय तक किडनी की कार्यप्रणाली को प्रभावित करती है। गुर्दे शरीर से अपशिष्ट एवं अतिरिक्त तरल पदार्थों को छानकर मूत्र के माध्यम से बाहर निकालते हैं। गंभीर क्रोनिक किडनी रोग की स्थिति में शरीर में तरल पदार्थ, इलेक्ट्रोलाइट्स एवं अपशिष्ट तत्वों का स्तर खतरनाक रूप से बढ़ सकता है। समय पर सही उपचार मिलने से मरीज स्वस्थ हो सकते हैं।
लगभग 36 वर्षों से होम्योपैथ चिकित्सक के रूप में सक्रिय डा. वी.के. वर्मा ने कहा कि होम्योपैथी में रोग नहीं, बल्कि रोगी के लक्षणों के अनुसार उपचार किया जाता है। मरीज का विश्वास उपचार की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

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