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Thursday, February 19, 2026

ब्राम्हण जातिवादी नहीं, यूजीसी नियम वापस ले सरकार - जगद्गुरु रामभद्राचार्य

वॉयस ऑफ बस्ती संवाददाता



बस्ती। महर्षि वशिष्ठ आश्रम, बढ़नी मिश्र में आयोजित वशिष्ठ रामायण कथा के दूसरे दिन जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने कहा कि वे अपने जीवन की 1415वीं कथा कह रहे हैं। उन्होंने कहा, “गुरु गृह गए पढ़न रघुराई, अल्प काल विद्या सब आई”—साक्षात भगवान श्रीराम अपने चारों भाइयों के साथ गुरू वशिष्ठ के आश्रम में शिक्षा लेने पहुंचे। जिससे ईश्वर ज्ञान प्राप्त करे, वह गुरू वशिष्ठ साधारण नहीं हो सकते।

रामभद्राचार्य ने कहा कि सरकार को यूजीसी का नया नियम वापस लेना होगा, समाज का विभाजन स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि ब्राम्हण कभी जातिवादी नहीं रहा, लेकिन आज आवश्यकता है कि ब्राम्हण समाज स्वयं जागरूक हो। उन्होंने आचरण की शुद्धता पर भी बल दिया।

उन्होंने बताया कि 20 फरवरी को दिन में 12 बजे गुरू वशिष्ठ, माता अरुंधती, श्रीराम, लक्ष्मण, भरत-शत्रुघ्न के विग्रहों की प्राण प्रतिष्ठा होगी। उन्होंने बस्ती को “वशिष्ठ नगर” बनाए जाने का समर्थन करते हुए कहा कि बढ़नी मिश्र की अपनी आध्यात्मिक महत्ता है। कथा के दौरान उन्होंने कहा कि यदि द्रोणाचार्य ने कर्ण को शिक्षा दी होती तो महाभारत न होता। गुरू वशिष्ठ ने सभी वर्गों को समान रूप से शिक्षा दी।

कार्यक्रम में आयोजक राना दिनेश प्रताप सिंह ने बस्ती का नाम वशिष्ठ नगर किए जाने की मांग दोहराई। कथा में हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल व पूर्व मुख्य सचिव दुर्गा शंकर राय के आगमन की सूचना दी गई। सांस्कृतिक संध्या में नम्रता सिंह, उर्मिला राज व अभिषेक राणा ने भजनों से श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। बड़ी संख्या में गणमान्य लोग व श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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