गोरखपुर। भारतीय रेलवे की स्वदेशी स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली "कवच" अब पूर्वोत्तर रेलवे की पटरियों पर भी उतरने जा रही है। महाप्रबंधक उदय बोरवणकर की अध्यक्षता में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में इरिसेट (IRISSET), सिकंदराबाद के कार्यकारी निदेशक मुनि कुमार ने कवच 4.0 वर्जन की विस्तृत जानकारी दी।
कवच के दो मुख्य घटक हैं –
1. ऑन-बोर्ड इक्विपमेंट (लोको कवच) : इसमें वाइटल कंप्यूटर, ब्रेक इंटरफेस यूनिट, ड्राइवर मशीन इंटरफेस, RFID रीडर, पल्स जेनरेटर और रेडियो एंटीना लगाए जाते हैं।
2. ट्रैक साइड इक्विपमेंट : इसमें स्टेशन मास्टर पैनल, ट्रैक पर RFID टैग्स और 40 मीटर ऊंचे रेडियो टॉवर्स शामिल होते हैं।
रेल मंत्रालय ने 1,441 रूट किमी पर कवच लगाने के लिए ₹492.21 करोड़ की परियोजना स्वीकृत की है। पहले चरण में 558 रूट किमी पर काम शुरू होगा।
- प्राथमिकता वाले रूट :
लखनऊ मंडल : सीतापुर-बुढवल, बुढवल-गोरखपुर कैंट
वाराणसी मंडल : गोरखपुर कैंट-गोल्डिनगंज
RFID टैगिंग और टावर लगाने का काम प्रगति पर है।
दो निविदाओं के माध्यम से कवच इंस्टालेशन का कार्य हो रहा है।
यह तकनीक रेल हादसों को रोकने, ट्रेनों की गति और नियंत्रण को बेहतर बनाने में क्रांतिकारी भूमिका निभाएगी।

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