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Sunday, March 3, 2024

अब फिर बन सकेंगे हैवी डीएल, मिला ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूल

- एआरटीओ ने लिया खबर का संज्ञान, बनी हैवी डीएल की व्यवस्था

- तीन महीने से मानक विहीन घोषित हो चुके हैं जिले में संचालित सात मोटर ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर 

बस्ती। जिले में अब हैवी ड्राइविंग लाइसेंस बनने का इंतजाम हो गया है। अमर उजाला में प्रकाशित खबर को गंभीरता से लेकर इसके लिए एआरटीओ पंकज कुमार सिंह ने एक मोटर ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूल का संचालन शुरू करवा दिया है। इससे तीन माह से भटक रहे डीएल के आवेदकों को अब परेशान नहीं होना पड़ेगा। 


तीन माह से जिले में हैवी ड्राइविंग लाइसेंस बनाने का कार्य ठप पड़ा हुआ है। इसका प्रमुख कारण यह है कि यहां पूर्व में संचालित सात ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूल तकरीबन तीन माह पहले दिसंबर में अवैध घोषित हो चुके हैं। जबकि इसके पूर्व हैवी डीएल बनवाने के लिए हर माह औसतन डेढ़ से दो सौ आवेदन प्राप्त होते थे। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि अब तक लगभग चार से पांच सौ आवेदक हैवी डीएल न बन पाने के कारण सुविधा से वंचित हो चुके हैं और वह बेरोजगारी व बेकारी का दंश झेल रहे हैं। इस खबर को अमर उजाला समाचार पत्र ने अपने तीन फरवरी के अंक में प्रमुखता से प्रकाशित किया था। आरटीओ प्रशासन फरीदुदीन ने कहा था कि इसके लिए जल्द ही कोई विकल्प तैयार किया जाएगा। उन्होंने एआरटीओ पंकज सिंह से अवध मोटर ड्राइविंग स्कूल की विचाराधीन पत्रावली की जांच करवाई और स्कूल के मानकों का स्थलीय परीक्षण व सत्यापन करवाया और उसके संचालन की व्यवस्था बनवाई है। 

उमरी दुधौरा में स्थापित हुआ स्कूल

एआरटीओ पंकज कुमार सिंह ने बताया कि शहर से सटे उमरी दुधौरा में अवध मोटर ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूल के मानकों का स्थलीय सत्यापन किया गया है। इसी सप्ताह इसमें ट्रेनिंग शुरू करवा दिया गया है। 

पांच करोड़ से डीटीआई तैयार, चार साल से सेंसर का इंतजार

2017-18 के वित्तीय वर्ष में परिवहन विभाग ने प्रदेश के सभी 19 संभागीय मुख्यालयों पर ड्राइविंग ट्रेनिंग इंस्टीच्यूट स्थापित करने का फैसला किया था। जगह नहीं मिल पाने के कारण इंस्टीट्यूट का निर्माण नहीं हो पा रहा था। लगभग डेढ़ साल बाद तत्कालीन डीएम डॉ. राजशेखर ने 24 जून 2019 को आईटीआई परिसर में जमीन मुहैया कराई और इंस्टीट्यूट का शिलान्यास किया। इसके निर्माण की जिम्मेदारी उप्र राज्य निर्माण सहकारी संघ लिमिटेड को सौंपी गई थी। 4 करोड़ 82 लाख 31 हजार रुपये खर्च कर इंस्टीट्यूट का निर्माण 2020 में ही पूरा हो चुका है। ट्रैक व परिसर को दुरुस्त किया जा चुका है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार टेंडर की प्रक्रिया भी लगभग पूरी हो चुकी है। अब कार्यदायी कंपनी को आटोमेटिक सेंसर लगाना बाकी है और उसी के अनुसार डीएल जारी होने लगेंगे। 

इस तरह सेंसर से होगा परीक्षण

संभागीय परिवहन निरीक्षक (आरआई) संजय कुमार दास के अनुसार सेंसर से ट्रैक पर टेस्ट के दौरान वाहन चलाने वालों की हर गतिविधि की जांच होगी। सेंसर कंट्रोल रूम से जुड़ेंगे। ट्रैक गणित के अंक आठ (8) के आकार का बना है। वाहन के ट्रैक पर आने के बाद स्पीड, दाएं या बाएं वाहन को मोड़ने पर इंडीकेटर, चढ़ाई और ढलान पर वाहन चलाने आदि पर अंक मिलेंगे। आरआई ने बताया कि सेंसर यह भी नजर रखेगा कि ट्रैफिक सिग्नल का पालन किया गया कि नहीं। वाहन चलाते वक्त कितनी बार नियमों का उल्लंघन किया गया। इन सभी गतिविधियों की जांच सेंसर करेगा। इसके बाद कंप्यूटर से रिजल्ट मिलेगा। इसी के आधार पर स्थायी डीएल जारी किया जाएगा। ऑटोमेटिक ड्राइविंग टेस्टिंग ट्रैक पर छोटी कार से ही टेस्ट दिया जा सकेगा।

एक भी ड्राइविंग स्कूल नहीं थे वैध, लाइसेंस हो चुका है खारिज

जिले में स्थापित सात में एक भी मोटर ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूल मानक नहीं पूरा कर पाए था। लिहाजा सभी का लाइसेंस दिसंबर में ही निरस्त किया जा चुका है। परिवहन विभाग में कामर्शियल वाहन चालक लाइसेंस के लिए मोटर ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूल कोर्स करने के बाद ही लाइसेंस जारी किया जाता है। जिले में कुल सात ट्रेनिंग स्कूल थे जो सभी मानक विहीन थे। जिसकी संभागीय प्राविधिक निरीक्षक यानी कि आरआई संजय दास ने जांच के बाद पुष्टि किया था। 

यह होना चाहिए मानक

परिवहन विभाग के डाटा बेस आपरेटर राकेश तिवारी व प्रधान सहायक सभाजीत पाल के अनुसार मोटर ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूलों के मानक में स्वागत कक्ष व कार्यालय कक्ष ऐसा होना चाहिए जिसमें इंटरनेट कनेक्शन व कंप्यूटर प्रिंटर सहित, व्याख्यान कक्ष (न्यूनतम 30 व्यक्तियों के लिए), सिमुलेटर कक्ष (एक प्रकार के वाहन के लिए), मॉडल चार्ट व उपकरण, सभी यानों के लिए पार्किंग व फर्नीचर कंप्यूटर सहित मल्टीमीडिया प्रोजेक्टर आदि होना चाहिए।

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