लखनऊ। राजधानी बटलर पैलेस स्थित आकांक्षा विद्या केंद्र में गुरुवार को राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस की शुरुआत की गई।जिसे मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. मनोज अग्रवाल ने बच्चों को पेट से कीड़े निकालने की दवा एल्बेंडाजोल खिलाकर शुभारंभ किया। जिसमें 54 बच्चों को एल्बेंडाजोल खिलाई गई । वहीं सीएचसी के अधीक्षक डा. रितेश और जिला स्वास्थ्य शिक्षा एवं सूचना अधिकारी के नेतृत्व में रेडक्रॉस सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की स्वास्थ्य टीम ने नारी शिक्षा निकेतन में 500 छात्राओं और एनकेरोड सीएचसी के अधीक्षक डा. वाईके सिंह और डीसीपीम विष्णु प्रताप और स्वास्थ्य टीम ने घसियारी मंडी स्थित बाबा ठाकुर दास इंटरमीडिएट कॉलेज में 350 बच्चों को पेट से कीड़े निकालने की दवा खिलाई गई। वहीं आकांक्षा केंद्र पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने कहा कि साल में दो बार राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस का आयोजन होता है। जिसके तहत एक से 19 साल के बच्चों को साल में दो बार पेट से कीड़े निकालने की दवा का सेवन कराया जाता है।जिससे कि उन्हें इस समस्या से छुटकारा मिल सके। डॉ.अग्रवाल ने कहा कि बच्चों में पेट में कीड़े होना आम समस्या है।इससे बच्चों में न केवल खून की कमी होती है बल्कि शारीरिक वृद्धि में भी रुकावट आती है।
पेट में कीड़े होने का सबसे मुख्य कारण गंदगी है। जैसे कि कुछ भी खाने से पहले हाथ न धोना। इसके अलावा कई बच्चे मिट्टी में खेलते हैं ऐसे में भी कीड़े पेट में प्रवेश कर जाते हैं।इसके अलावा दूषित पानी पीने से भी यह समस्या हो सकती है। उन्होंने बच्चों से कहा कि कुछ भी खाने से पहले हाथ अच्छे से धोएं, साफ पानी पीएं। इसी क्रम में नोडल अधिकारी डा. संदीप सिंह ने कहा कि जनपद के 21 लाख से अधिक बच्चों को एल्बेंडाजोल खिलाने का लक्ष्य था।जनपद के 4195 सरकारी स्कूलों, सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों और निजी विद्यालयों के और 2700 आंगनबाड़ी केंद्र के माध्यम से लगभग 13 लाख बच्चों को पेट से कीड़े निकालने की दवा एल्बेंडाजोल खिलाई गई।
जो बच्चे आज दवा का सेवन करने से वंचित रह गए हैं उन्हें 17 अगस्त को माप अप राउंड का आयोजन कर दवा खिलाई जाएगी। कार्यक्रम में डीपीएम सतीश यादव,डीईआईसी मैनेजर डा.गौरव सक्सेना, आकांक्षा विद्या केंद्र की प्रधानाध्यापक डा. नंदिता सिंह, बाबा ठाकुर दास इंटरमीडिएट कॉलेज के प्रधानाध्यापक सुधाम चांदवानी,नारी शिक्षा निकेतन की प्रधानाध्यापिका सुनीता मौजूद रहीं।इसके अलावा शहरी एवं ग्रामीण स्वास्थ्य इकाइयों के माध्यम से सरकारी स्कूलों, सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों और निजी विद्यालयों और आंगनबाड़ी केंद्रों पर पेट से कीड़े निकालने की दवा खिलाई गई।
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