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Thursday, September 16, 2021

कविता

कविता सकारत्मक सोच और सच की आवाज है

हिंदी साहित्य की अनमोल धरोवर और  साज है। 


कविता है भोर बेला की वो सुंदर सुहानी ऊर्जा ।

जिससे स्वस्थ और ठीक रहता है शरीर का हर पुर्जा। 


इसमें आयरन, कैल्शियम और आक्सीजन की भरमार है।

जिसे सूनने वाला नही पड़ता  कभी भी बीमार है।। 


उगते हुये सूरज,से हर दिन नई  उम्मीद, गुलज़ार है

चहचहाती चिडियों के शोर में बचपन का सार है। 


बहती नदी में लहरों का सदैव आगे चलने की पुकार है।

वो कविता ही है जिसमे मन्ज़िल को राही का इंतजार है। 


हँसता खिलता प्रेम से भरा एक सम्पूर्ण परिवार है।

जिसमे संस्कार,भाव ,सम्मान और आदर की भरमार।। 


उसमे करुणा,श्रृंगार,वियोग और वीर रस का सार है।

कविता हिंदी सहित्य का दमकता अदभुत श्रृंगार है।



जिसमे देने की चाह,सर्वधर्म समभाव की भरमार है।

मिट्टी से जुड़ कर और ज़मीन पर खिलने में प्यार है। 


फूलो में रस है जिस पर भौरों की भरमार है।

कविता ढूढता पत्थर में शंकर भक्ति और प्यार है। 


भावों का समंदर है जिसमे नैया बहती बिन पतवार है।

वो कविता ही जो गागर में भरती सागर और संसार है।



वो कविता ही है जिसे कुन्दन करता बेहद प्यार है।

तभी तो हम सभी कवियों को मिलता श्रोताओं का प्यार है।
कुंदन वर्मा "पूरब"

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