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Tuesday, September 14, 2021

पराली जलाने से उर्वरा शक्ति होती है कम, पराली न जलायें - अपर जिलाधिकारी

 संत कबीर नगर। अपर जिलाधिकारी (वि0/रा0) मनोज कुमार सिंह ने जनपद के किसान भाईयो के सूचनार्थ बताया है कि फसल कटाई के उपरान्त फसल अवशेष/पराली/अन्य कृषि अपशिष्ट जलाने से मृदा की उत्पादन क्षमता एवं उर्वरता पर विपरित प्रभाव पडता है, लाभकारी शूक्ष्म जीव अधिक तापमान के कारण नष्ट हो जाते है, मृदा में जैव पदार्थ की कमी हो जाती है। मृदा में जैव पदार्थ की कमी के कारण पौधों के विकास एवं वृद्धि के लिए आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्वों की उपलब्धता कम हो जाती है, मृदा की जल धारण क्षमता घट जाती है। परिणाम स्वरूप फसल की उपज पर विपरित प्रभाव पड़ता है। इसके साथ-ही पर्यावरण प्रदूषित होता है, जिससे अत्यन्त गम्भीर बिमारियॉ होती हैं।  

उन्होंने जनपद के किसान भाईयों से अपील की है कि अपने धान फसल कटाई के उपरान्त फसल अवशेष/पराली को खेत में मिलाकर बायो-डिकम्पोजर का प्रयोग कर, खेत में ही सडा़कर खाद बना लें, इसके अतिरिक्त फसल अवशेष/पराली को खाद के गढ्ढे में भर कर बायो-डि कम्पोजर के छिड़काव करें, यह कुछ समय बाद खाद का रूप ले लेगीं, जिसका आप अपनी फसल में प्रयोग कर सकते है, जिससे फसल की उत्पादकता में वृद्धि होगी एवं मिट्टी की जल धारण क्षमता बढेगी। साथ-ही पर्यावरण प्रदूषित नहीं होगा। अपर जिलाधिकारी ने बताया कि यदि किसी के खेत में पराली/फसल अवशेष/अन्य कृषि अपशिष्ट को जलाया जाता है तो संबंधित कृषक के विरूद्ध नियमानुसार कार्यवाही की जायेगी।


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