गोरखपुर। जिलाधिकारी दीपक मीणा के निर्देशन में बाल विकास विभाग की ओर से संचालित नवाचार ‘मिशन खिलखिलाहट’ के तहत कुपोषित बच्चों को सुपोषित बनाने की दिशा में सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। जिला कार्यक्रम अधिकारी डॉ. अभिनव कुमार मिश्र द्वारा पूर्व में गोद लिए गए चार बच्चों में से दो बच्चे गंभीर तीव्र कुपोषण (एसएएम) की श्रेणी से निकलकर सामान्य पोषण श्रेणी में पहुंच गए हैं, जबकि दो अन्य बच्चे तीव्र कुपोषण से मध्यम कुपोषण (एमएएम) की श्रेणी में आ गए हैं। इस पहल के तहत अब तक जनपद के लगभग 680 बच्चे कुपोषण से निकलकर सुपोषित श्रेणी में आ चुके हैं।
शनिवार को शहर परियोजना के बरगदवा क्षेत्र में जिला कार्यक्रम अधिकारी डॉ. अभिनव कुमार मिश्र ने बच्चों के घर पहुंचकर उनके स्वास्थ्य, वजन, लंबाई और पोषण की स्थिति का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने अभिभावकों से बच्चों की देखभाल और उन्हें दिए जा रहे आहार की जानकारी ली। भ्रमण का उद्देश्य बच्चों की वृद्धि की निगरानी करने के साथ उनके परिवारों को उचित पोषण एवं स्वास्थ्य संबंधी जानकारी देना रहा।
- दो बच्चियां सामान्य पोषण श्रेणी में पहुंचीं
विभागीय जानकारी के अनुसार, लाडो और वैष्णवी सामान्य पोषण श्रेणी में पहुंच गई हैं। वहीं अंशिका और अर्पिता की स्थिति में भी सुधार हुआ है और वे मध्यम कुपोषण की श्रेणी में आ गई हैं। बच्चों के पिता दैनिक मजदूरी करते हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद परिवारों ने नियमित परामर्श और उपलब्ध पोषण सेवाओं का लाभ लेकर बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार के लिए प्रयास किए।
- एक और बच्चे को लिया गोद
गृह भ्रमण के दौरान जिला कार्यक्रम अधिकारी ने दिव्यांश को भी ‘मिशन खिलखिलाहट’ के तहत गोद लिया। उसकी लंबाई 97 सेंटीमीटर और वजन 11 किलोग्राम दर्ज किया गया। बच्चे के पोषण स्तर में सुधार के लिए नियमित निगरानी, पोषण संबंधी आवश्यकताओं के आकलन और परिवार को आवश्यक परामर्श देने पर जोर दिया गया।
- अभिभावकों को दिया पोषण का संदेश
भ्रमण के दौरान अभिभावकों को संतुलित एवं पौष्टिक आहार, स्वच्छता, नियमित वृद्धि निगरानी और बच्चों की उचित देखभाल के बारे में जागरूक किया गया। उन्हें स्थानीय स्तर पर उपलब्ध पौष्टिक खाद्य पदार्थों को भोजन में शामिल करने तथा स्वास्थ्य संबंधी समस्या होने पर समय से चिकित्सा सेवाएं लेने की सलाह दी गई। सभी बच्चों को पोषण पोटली भी प्रदान की गई।
इस अवसर पर यूनिसेफ के सुरेश तिवारी, क्षेत्रीय मुख्य सेविका शीला यादव, आंगनबाड़ी कार्यकत्री आशा पांडेय एवं शशिकला चौहान सहित आंगनबाड़ी सहायिका उपस्थित रहीं। सभी ने बच्चों के स्वास्थ्य में निरंतर सुधार के लिए नियमित निगरानी और परिवारों की सहभागिता सुनिश्चित करने पर बल दिया।
मुख्य विकास अधिकारी शाश्वत त्रिपुरारी और जिलाधिकारी दीपक मीणा द्वारा भी इस पहल का नियमित अनुश्रवण एवं मूल्यांकन किया जाता है। ‘मिशन खिलखिलाहट’ के माध्यम से कुपोषित बच्चों की पहचान, नियमित देखभाल, पोषण परामर्श और सामुदायिक सहभागिता के जरिए उन्हें स्वस्थ बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

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