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Wednesday, October 28, 2026

आंसुओं के सैलाब में विदा हुए महुली थानेदार दुर्गेश पांडेय, लोगों ने कहा- तुमको न भूल पाएंगे


वॉयस ऑफ बस्ती संवाददाता

संतकबीरनगर। महुली थाने से थानाध्यक्ष दुर्गेश पांडेय की विदाई बुधवार को भावुक पलों की गवाह बनी। किसी ने उन्हें गले लगाकर विदाई दी तो किसी की आंखें छलक पड़ीं। एक वृद्ध महिला का उनसे लिपटकर बिलखना, महिलाओं की टोली का उनकी गाड़ी रोकने का प्रयास करना और साथी पुलिसकर्मियों का भावुक होकर उनसे मिलना इस बात की गवाही दे रहा था कि उन्होंने अपने कार्यकाल में लोगों के दिलों में खास जगह बनाई थी। पूरे परिसर में गूंजती दुआओं और नम आंखों के बीच उनकी विदाई लंबे समय तक याद की जाएगी।

क्षेत्र के लोगों के मुताबिक, दुर्गेश पांडेय ने थाने को अपना घर और फरियादियों को सम्मान का पात्र समझा। उन्होंने सख्त कानून व्यवस्था के साथ मानवीय संवेदनाओं को भी प्राथमिकता दी। हिंसा और अभद्रता से दूर रहकर कानून का इकबाल बुलंद करने की उनकी कार्यशैली ने लोगों को प्रभावित किया। अपराध पर अंकुश लगाने के साथ उन्होंने छोटी-छोटी सूचनाओं को भी गंभीरता से लिया और हर चुनौती का जिम्मेदारी से सामना किया।

मार्ग दुर्घटनाओं में घायलों की मदद के लिए तत्पर रहकर उन्होंने पुलिस की संवेदनशील छवि प्रस्तुत की। उनका मानना था कि अपराध से नफरत होनी चाहिए, अपराधी से नहीं। इसी सोच के साथ उन्होंने अपने दायित्वों का निर्वहन किया। स्वच्छता, त्वरित न्याय और शासन की गाइडलाइन के पालन पर जोर देने वाले दुर्गेश पांडेय को दो बार जिले के सर्वश्रेष्ठ पुलिस अधिकारी का पुरस्कार भी मिला।

विदाई समारोह में अंतरराष्ट्रीय शायर असद महताब ने अपने संबोधन के माध्यम से दुर्गेश पांडेय के व्यक्तित्व और उनके प्रति लोगों के सम्मान को शब्दों में पिरोने का प्रयास किया। एक पुलिस अधिकारी के साथ-साथ परिवार के मुखिया के रूप में भी उनकी भूमिका की चर्चा हुई। साथी पुलिसकर्मियों का भावुक होना उनके नेतृत्व और स्नेहपूर्ण व्यवहार को दर्शा रहा था।

कम समय में महुली से उनका स्थानांतरण क्षेत्रवासियों के लिए भावुक करने वाला रहा। हालांकि स्थानांतरण शासकीय व्यवस्था का हिस्सा है, लेकिन थानाध्यक्ष के रूप में उन्होंने जो विश्वास और अपनापन अर्जित किया, उसे कायम रखना नवागत इंस्पेक्टर हरेंद्र पाठक के लिए भी एक बड़ी जिम्मेदारी होगी।

महुली में दुर्गेश पांडेय की विदाई ने यह संदेश दिया कि वर्दी का सम्मान केवल अधिकार से नहीं, बल्कि कर्तव्यनिष्ठा, न्यायप्रियता और मानवीय व्यवहार से अर्जित होता है। उनके जाने के बाद क्षेत्र में एक ही आवाज गूंजती रही—“तुमको न भूल पाएंगे।”

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