वॉयस ऑफ बस्ती संवाददाता
लखनऊ। प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव डॉ. पी. के. मिश्रा ने आपदा जोखिम न्यूनीकरण के लिए समग्र दृष्टिकोण अपनाने पर जोर देते हुए कहा कि अगले दशक में लोगों की जान बचाने के साथ विकास की उपलब्धियों को सुरक्षित रखना और आर्थिक नुकसान कम करना भी प्राथमिकता होनी चाहिए।
संयुक्त राष्ट्र आपदा जोखिम न्यूनीकरण कार्यालय (यूएनडीआरआर) द्वारा आयोजित तथा भारत और यूनाइटेड किंगडम की सह-अध्यक्षता में हुई वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक को संबोधित करते हुए डॉ. मिश्रा ने जलवायु परिवर्तन, तेजी से बढ़ते शहरीकरण, अवसंरचना विस्तार और पर्यावरणीय क्षरण से उत्पन्न चुनौतियों का उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि पूर्व चेतावनी, आपदा तैयारी और आपातकालीन प्रतिक्रिया में सुधार से लोगों की जान बचाने में मदद मिली है, लेकिन आर्थिक नुकसान अब भी बड़ी चुनौती बना हुआ है। इसके लिए विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय और आपदाओं के परस्पर प्रभावों को समझना आवश्यक है।
डॉ. मिश्रा ने सेंडाई आपदा जोखिम न्यूनीकरण फ्रेमवर्क के वर्ष 2030 तक प्रभावी क्रियान्वयन में तेजी लाने तथा आपदा रोकथाम, शमन और संस्थागत क्षमता बढ़ाने में निवेश करने की जरूरत बताई। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वर्ष 2016 में प्रस्तुत आपदा जोखिम न्यूनीकरण के दस-सूत्रीय एजेंडे और वर्ष 2025 में आपदा प्रबंधन अधिनियम में किए गए संशोधनों का भी उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि आपदा वित्तपोषण का लक्ष्य केवल धन उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि ठोस और मापनीय परिणाम हासिल करना होना चाहिए। इसके लिए आपदा-रोधी अवसंरचना, मजबूत शहरी संस्थानों और प्रकृति-आधारित समाधानों को बढ़ावा देना जरूरी है।
उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मशीन लर्निंग और बहु-आपदा पूर्व चेतावनी प्रणालियों के प्रभावी इस्तेमाल पर भी बल दिया। साथ ही आपदा के बाद पुनर्निर्माण की अग्रिम योजना बनाने और अंतरराष्ट्रीय सहयोग मजबूत करने की आवश्यकता बताई।

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