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Monday, October 19, 2026

एआई फिल्म ‘वंदेमातरम और डॉ. हेडगेवार’ का उज्जैनी शॉर्ट फिल्म फेस्टिवल में चयन


भोपाल। राष्ट्रभक्ति, ऐतिहासिक चेतना और आधुनिक तकनीक के संगम से तैयार एआई लघु फिल्म ‘वंदेमातरम और डॉ. हेडगेवार’ ने महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार के जीवन और ‘वंदेमातरम’ से जुड़े उनके ऐतिहासिक संघर्ष पर आधारित इस फिल्म का चयन प्रतिष्ठित उज्जैनी शॉर्ट फिल्म फेस्टिवल के चौथे सीजन में स्क्रीनिंग के लिए किया गया है। फिल्म का निर्देशन और पटकथा लेखन माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के सहायक प्राध्यापक डॉ. लोकेन्द्र सिंह ने किया है।

ऐतिहासिक तथ्यों और संस्मरणों पर आधारित यह फिल्म ब्रिटिश शासन के दौर में राष्ट्रगीत ‘वंदेमातरम’ के सम्मान के लिए किए गए संघर्ष को पर्दे पर जीवंत करती है। फिल्म की कहानी वर्ष 1905 के बंग-भंग आंदोलन और अंग्रेजी हुकूमत की दमनकारी नीतियों की पृष्ठभूमि में आगे बढ़ती है। इसमें वर्ष 1907 में नागपुर के नील सिटी हाईस्कूल में किशोर केशव बलिराम हेडगेवार द्वारा ब्रिटिश स्कूल इंस्पेक्टर के सामने विद्यार्थियों से ‘वंदेमातरम’ का उद्घोष करवाने के प्रसंग को प्रमुखता से दर्शाया गया है।

फिल्म में वर्ष 1908 में मध्य प्रदेश के रामपायली में दशहरे के अवसर पर हेडगेवार के ओजस्वी भाषण ‘सीमोल्लंघन’, उनके खिलाफ चले राजद्रोह के मुकदमे और परिवार को झेलनी पड़ी कठिनाइयों का भी चित्रण किया गया है। इसके अलावा वर्ष 1930 के यवतमाल जंगल सत्याग्रह के दौरान उनकी अकोला जेल यात्रा, रेलवे स्टेशनों पर उमड़ी जनसमूह की भीड़ और गूंजते ‘वंदेमातरम’ के उद्घोष को प्रभावशाली दृश्यों एवं संगीत के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है। वर्ष 1937 में राष्ट्रगीत के सम्मान की रक्षा के लिए उनके प्रयासों को भी फिल्म में स्थान मिला है।

- युवा पीढ़ी को इतिहास से जोड़ने का प्रयास

फिल्म के निर्देशक डॉ. लोकेन्द्र सिंह ने कहा कि ‘वंदेमातरम’ महज एक गीत या नारा नहीं, बल्कि भारत की स्वतंत्रता की भावना और राष्ट्रीय चेतना का अमर प्रतीक है। डॉ. हेडगेवार का जीवन मातृभूमि के प्रति समर्पण और राष्ट्रभाव के प्रति प्रतिबद्धता की प्रेरणा देता है। उन्होंने बताया कि यह उनकी पहली एआई फिल्म है। इसके माध्यम से इतिहास के उन महत्वपूर्ण प्रसंगों को नई तकनीक के जरिए प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है, जो युवा पीढ़ी को देश के स्वतंत्रता संघर्ष और उसके नायकों से परिचित कराते हैं।

गौरतलब है कि डॉ. लोकेन्द्र सिंह की पूर्ववर्ती फिल्में ‘बाचा : द राइजिंग विलेज’, ‘समिधा’, ‘गो-वर’ और ‘कद’ राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोहों में सराहना प्राप्त कर चुकी हैं। ऐसे में ‘वंदेमातरम और डॉ. हेडगेवार’ का उज्जैनी शॉर्ट फिल्म फेस्टिवल में स्क्रीनिंग के लिए चयन उनके फिल्म निर्माण के सफर में एक और उल्लेखनीय उपलब्धि है।

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