- पूर्व आईपीएस जुगुल किशोर ने धरने को दिया समर्थन, छात्रों को जाति-धर्म के दायरे में बांटने का किया विरोध
बस्ती। शिक्षा व्यवस्था में सुधार और यूजीसी के नए कानूनों की वापसी समेत सात सूत्रीय मांगों को लेकर मेधा पार्टी का धरना शनिवार को 55वें दिन भी जारी रहा। गांधीकला भवन परिसर स्थित बापू प्रतिमा के निकट चल रहे धरने में पहुंचे पूर्व आईपीएस अधिकारी जुगुल किशोर ने आंदोलन को समर्थन देते हुए सरकार से यूजीसी के नए कानूनों पर पुनर्विचार कर उन्हें वापस लेने की मांग की।
पूर्व आईपीएस जुगुल किशोर ने कहा कि छात्रों को जाति और धर्म के दायरे में बांटना उचित नहीं है। उन्होंने रोहित वेमुला प्रकरण का उल्लेख करते हुए कहा कि इस तरह के मामलों को मानक बनाकर नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि बेहतर होगा कि सरकार यूजीसी के नए कानूनों पर पुनर्विचार करे और उन्हें वापस लेने की दिशा में कदम उठाए।
मेधा पार्टी के केंद्रीय प्रवक्ता दीन दयाल त्रिपाठी ने कहा कि 55 दिनों से लगातार धरना चलने के बावजूद केंद्र सरकार की ओर से अब तक कोई सकारात्मक पहल नहीं की गई है। उन्होंने पूर्व आईपीएस जुगुल किशोर को आंदोलन की पृष्ठभूमि, सात सूत्रीय मांगों और मेधा पार्टी के उद्देश्यों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
मेधा पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य पं. सुनील भट्ट ने कहा कि सरकार को छात्रों को जाति और धर्म के ढांचे में बांटने की कोशिश बंद करनी चाहिए। उन्होंने मांग की कि छात्रों के हितों को ध्यान में रखते हुए संबंधित कानूनों पर पुनर्विचार किया जाए और मनमाने कानूनों को वापस लिया जाए।
धरने के 55वें दिन उमेश पाण्डेय मुन्ना, प्रशान्त पाण्डेय, विशाल सिंह, दीपक शुक्ला, बृजेश द्विवेदी, अजय कुमार चौधरी, राहुल त्रिपाठी, विपुल सिंह, कृष्ण कुमार पाठक, गौरीशंकर त्रिपाठी, आदित्य नारायण त्रिपाठी, सुयश पाठक, दिव्यांश पाण्डेय, निखिल पाण्डेय, संतोष प्रधान, गुड्डू मिश्र, प्रमोद उपाध्याय, बृजेश कुमार पाण्डेय, वृहस्पति त्रिपाठी, उदय पाण्डेय और कृपाशंकर तिवारी सहित मेधा पार्टी के अनेक पदाधिकारी, सदस्य और विभिन्न संगठनों के लोग मौजूद रहे।

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