- जन्मशती समारोह में पूर्व प्रधानमंत्री के संघर्ष, सादगी और समाजवादी विचारधारा को किया गया याद
समारोह को संबोधित करते हुए सांसद रामप्रसाद चौधरी ने कहा कि चन्द्रशेखर भारतीय राजनीति के उन विरले नेताओं में थे, जिन्होंने पद से अधिक सिद्धांत और जनहित को महत्व दिया। उनका पूरा राजनीतिक जीवन संघर्ष, सादगी और जनसेवा की मिसाल रहा। किसानों, गरीबों और आम जनता की समस्याओं को उन्होंने सदैव मजबूती से उठाया। छात्र जीवन से ही सामाजिक एवं राजनीतिक आंदोलनों से जुड़े चन्द्रशेखर ने अपने विचारों और संघर्ष के बल पर राष्ट्रीय राजनीति में विशिष्ट पहचान बनाई।
उन्होंने कहा कि चन्द्रशेखर ने युवाओं को साथ लेकर देश को समाजवादी दिशा देने का प्रयास किया। जयप्रकाश नारायण के आंदोलन से जुड़कर उन्होंने लोकतंत्र और जनहित के लिए संघर्ष किया। इसके चलते उन्हें जेल और नजरबंदी तक झेलनी पड़ी, लेकिन कठिन परिस्थितियां भी उनके विचारों और संकल्प को कमजोर नहीं कर सकीं। उनका जीवन आज के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है।
प्रो. राजकुमार जैन ने कहा कि ‘युवा तुर्क’ के रूप में प्रसिद्ध चन्द्रशेखर अपनी स्पष्टवादिता और निर्भीक फैसलों के लिए जाने जाते थे। देशहित के मुद्दों पर उनकी सोच स्पष्ट और मजबूत थी। डॉ. सुनीलम ने कहा कि चन्द्रशेखर ने समाज के कमजोर वर्गों की आवाज को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती दी। उनका मानना था कि राजनीति का मूल उद्देश्य जनता की सेवा होना चाहिए।
डॉ. राकेश पाठक ने कहा कि चन्द्रशेखर का व्यक्तित्व संघर्ष और सादगी का प्रतीक था। आज के दौर में उनके विचार और आदर्श पहले से अधिक प्रासंगिक हैं। प्रो. अरुण त्रिपाठी ने कहा कि उन्होंने लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने के लिए जीवनभर संघर्ष किया। अशोक कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि कठिन परिस्थितियों में भी चन्द्रशेखर ने अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया।
डॉ. रघुवंशमणि त्रिपाठी ने कहा कि चन्द्रशेखर केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि एक विचारधारा थे। उनके विचार आने वाली पीढ़ियों को दिशा देते रहेंगे। रमेश कुमार ने कहा कि देश की एकता, लोकतांत्रिक व्यवस्था और सामाजिक सरोकारों को मजबूत करने में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा।
विधायक महेन्द्रनाथ यादव, पूर्व विधायक राजमणि पाण्डेय, अरुण कुमार श्रीवास्तव और श्याम जी त्रिपाठी ने चन्द्रशेखर के प्रधानमंत्री बनने और उनके राजनीतिक जीवन के विभिन्न पड़ावों पर चर्चा की। वक्ताओं ने कहा कि 1989 के राजनीतिक घटनाक्रम के बाद चन्द्रशेखर कांग्रेस के समर्थन से प्रधानमंत्री बने। हालांकि कुछ ही समय बाद कांग्रेस द्वारा समर्थन वापस लिए जाने के कारण उनकी सरकार संकट में आ गई और उन्होंने 21 जून 1991 को प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया।
कार्यक्रम संयोजक लोकतंत्र सेनानी डॉ. हरिओम श्रीवास्तव ने कहा कि चन्द्रशेखर ने राजनीति में पद से अधिक विचारों को महत्व दिया। जन्मशती समारोह का उद्देश्य उनके विचारों, संघर्ष और राष्ट्र के प्रति योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाना है।
आयोजन समिति के रजवंत सिंह, राजकुमार पाण्डेय, अजय कुमार सिंह ‘अरुण’, अनिल कुमार सिंह, सुभाष नाथ, श्रवण कुमार सिंह, गोपाल जी गौतम, मो. इब्राहिम, प्रहलाद गुप्ता और सिराज अहमद ने कार्यक्रम की व्यवस्थाओं में सहयोग किया। समारोह में बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। ब्रजेश मिश्र, अखण्ड प्रताप सिंह सहित अन्य लोगों ने भी श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम के अंत में पूर्व नेता प्रतिपक्ष राम गोविन्द चौधरी के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए श्रद्धासुमन अर्पित किए गए।

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