ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि गोरखपुर के कुछ थोक व्यवसायियों द्वारा यूरिया और डीएपी खाद रिटेलरों को अधिक कीमत पर उपलब्ध कराई जा रही है। संगठन का कहना है कि रिटेलरों के माध्यम से किसानों तक पहुंचने वाली खाद की कीमत भी निर्धारित दर से अधिक हो जाती है।
किसान यूनियन के अनुसार, किसानों को यूरिया खाद 267 रुपये में मिलनी चाहिए, जबकि कुछ स्थानों पर थोक एवं खुदरा स्तर पर अधिक कीमत वसूले जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं। डीएपी को लेकर भी किसानों से निर्धारित मूल्य से अधिक राशि लिए जाने का आरोप लगाया गया है।
ज्ञापन में यह भी आरोप लगाया गया कि खाद के साथ सल्फर, जिंक और कैल्शियम जैसे अन्य उत्पादों की टैगिंग कर किसानों को खरीद के लिए बाध्य किया जा रहा है। यूनियन ने टैगिंग की व्यवस्था पर रोक लगाने तथा किसानों को यूरिया, डीएपी एवं अन्य उर्वरक सरकारी निर्धारित दरों पर स्वतंत्र रूप से उपलब्ध कराने की मांग की।
संगठन ने प्रशासन से थोक खाद व्यवसायियों की जांच कराने और किसानों से कथित अधिक वसूली एवं शोषण के मामलों में नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की है।

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