गोरखपुर। सरस्वती शिशु मंदिर (10+2), पक्कीबाग में शनिवार को 'कौशल बोध एवं कौशल विकास' विषय पर भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों की छिपी प्रतिभाओं को पहचानकर उन्हें आधुनिक एवं व्यावहारिक कौशल से जोड़ना तथा आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित करना रहा।
उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए सह क्षेत्रीय प्रमुख (कौशल बोध एवं कौशल विकास) ने कहा कि वर्तमान प्रतिस्पर्धी दौर में केवल शैक्षणिक डिग्री पर्याप्त नहीं है। युवाओं में कौशल विकास समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि विद्यालयों में कौशल आधारित शिक्षा को दैनिक गतिविधियों का हिस्सा बनाकर विद्यार्थियों को रोजगारोन्मुख और स्वावलंबी बनाया जा सकता है।
कार्यक्रम में प्रांतीय प्रमुख अभिषेक जायसवाल ने प्रोजेक्टर के माध्यम से कौशल विकास की अवधारणा को सरल ढंग से समझाया। उन्होंने "लर्निंग बाय डूइंग" (करके सीखने) की पद्धति पर बल देते हुए आचार्यों से प्रत्येक छात्र की विशेष प्रतिभा को पहचानकर उसे विकसित करने का आह्वान किया।
समापन सत्र में क्षेत्रीय प्रमुख सुरेश चंद्र श्रीवास्तव ने कहा कि सभी बच्चे हर कार्य नहीं कर सकते, लेकिन प्रत्येक बच्चे में कोई न कोई विशेष क्षमता अवश्य होती है। शिक्षकों का दायित्व है कि वे विद्यार्थियों की उसी क्षमता को पहचानकर उसे सही दिशा दें।
कार्यक्रम में अतिथियों का स्वागत एवं परिचय डॉ. राजेश सिंह ने कराया। इस अवसर पर राम सिंह (प्रदेश निरीक्षक, शिशु शिक्षा समिति, गोरक्ष प्रांत), जियालाल (प्रदेश निरीक्षक, जन शिक्षा समिति) तथा अजय दुबे (संभाग निरीक्षक, गोरखपुर) सहित अनेक वरिष्ठ पदाधिकारी उपस्थित रहे।
गोरक्ष प्रांत के विभिन्न सरस्वती शिशु मंदिरों से आए आचार्य एवं आचार्याओं ने कार्यक्रम में सहभागिता करते हुए विद्यालयों में कौशल आधारित शिक्षा को प्रभावी ढंग से लागू करने का संकल्प लिया।

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