वॉयस ऑफ बस्ती संवाददाता
नई दिल्ली/गोरखपुर। गोरखपुर के सांसद रवि किशन शुक्ल ने लोकसभा में नियम-377 के अंतर्गत विशेष उल्लेख के माध्यम से गोरखपुर में राष्ट्रीय औषधि शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान की स्थापना का मुद्दा उठाते हुए केंद्र सरकार से शीघ्र आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की। उन्होंने कहा कि यह संस्थान पूर्वांचल के स्वास्थ्य, शिक्षा, अनुसंधान और औद्योगिक विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण साबित होगा।सांसद ने कहा कि गोरखपुर पूर्वी उत्तर प्रदेश का प्रमुख स्वास्थ्य केंद्र बन चुका है। यहां अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) गोरखपुर और बाबा राघव दास मेडिकल कॉलेज सहित कई प्रमुख चिकित्सा संस्थान संचालित हैं, जो पूर्वी उत्तर प्रदेश के साथ बिहार और नेपाल सीमा से जुड़े क्षेत्रों के लाखों लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करा रहे हैं। इसके बावजूद पूरे क्षेत्र में औषधि शिक्षा, औषधि अनुसंधान, जैव प्रौद्योगिकी और चिकित्सा नवाचार के लिए राष्ट्रीय स्तर का कोई संस्थान नहीं है।
उन्होंने कहा कि गोरखपुर में राष्ट्रीय औषधि शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान की स्थापना होने से पूर्वी उत्तर प्रदेश के अलावा बिहार, झारखंड, उत्तराखंड तथा नेपाल सीमा से जुड़े क्षेत्रों के विद्यार्थियों, शोधार्थियों और वैज्ञानिकों को उच्चस्तरीय शिक्षा एवं अनुसंधान की सुविधाएं मिलेंगी। इससे औषधि उद्योग, जैव प्रौद्योगिकी, चिकित्सा उपकरण निर्माण, नवाचार, कौशल विकास और रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
रवि किशन ने कहा कि यह संस्थान क्षेत्र में निवेश को आकर्षित करेगा तथा औषधि उद्योग को नई दिशा देगा। साथ ही यह आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया जैसे राष्ट्रीय अभियानों को भी मजबूती प्रदान करेगा।
उन्होंने केंद्र सरकार से जनहित, संतुलित क्षेत्रीय विकास तथा देश में औषधि शिक्षा एवं अनुसंधान को सशक्त बनाने के उद्देश्य से गोरखपुर में राष्ट्रीय औषधि शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान की स्थापना के लिए शीघ्र निर्णय लेने का आग्रह किया। सांसद ने विश्वास व्यक्त किया कि इस संस्थान की स्थापना से पूर्वांचल शिक्षा, अनुसंधान, स्वास्थ्य और औद्योगिक विकास का प्रमुख केंद्र बनकर उभरेगा तथा क्षेत्र की सामाजिक और आर्थिक प्रगति को नई गति मिलेगी।

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