वॉयस ऑफ बस्ती संवाददाता
नई दिल्ली। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHA) ने कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर किमी-64 के पास सड़क की ऊपरी परत में स्लिपेज मिलने के बाद तत्काल मरम्मत कार्य शुरू कराते हुए परियोजना की निगरानी में लापरवाही बरतने वाले तीन अधिकारियों के खिलाफ सख्त प्रशासनिक कार्रवाई की है। प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि घटना का पुल की संरचनात्मक सुरक्षा या निर्माण गुणवत्ता से कोई संबंध नहीं है तथा एक्सप्रेसवे पर यातायात पूरी तरह सुरक्षित और सुचारु रूप से संचालित हो रहा है।
एनएचएआई के अनुसार रविवार 26 जुलाई को रूट पेट्रोलिंग के दौरान किमी-64 के निकट सड़क की सतह पर स्लिपेज दिखाई दिया। सूचना मिलते ही एनएचएआई और निर्माणकारी संस्था की टीम मौके पर पहुंची तथा विस्तृत तकनीकी निरीक्षण किया। जांच में पाया गया कि पुल के डैक स्लैब के ऊपर बिटुमिनस परत में मामूली स्लिपेज हुआ है, जो लगातार वर्षा, भारी यातायात, नमी में बदलाव और जॉइंट्स से वर्षा जल के प्रवेश के कारण उत्पन्न हुआ। निरीक्षण में पुल की नींव, सब-स्ट्रक्चर और सुपर-स्ट्रक्चर पूरी तरह सुरक्षित पाए गए तथा किसी प्रकार की संरचनात्मक क्षति नहीं मिली।
निर्माणकारी संस्था द्वारा तत्काल क्षतिग्रस्त बिटुमिनस परत हटाकर नई परत बिछाई गई। साथ ही वर्षा जल के प्रवेश को रोकने के लिए जॉइंट सीलिंग और स्थानीय जल निकासी व्यवस्था में भी आवश्यक सुधार किए गए।
मामले को गंभीरता से लेते हुए एनएचएआई ने निर्माणकारी संस्था के प्रोजेक्ट मैनेजर सह डीजीएम (हाइवे) विवेक कुमार गुप्ता, इंडिपेंडेंट इंजीनियर के टीम लीडर सुरेंद्र कुमार तथा रेजिडेंट इंजीनियर यतेंद्र कुमार को परियोजना से हटाते हुए अगले दो वर्षों तक सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, एनएचएआई और एनएचएआईडीसीएल की किसी भी परियोजना में भाग लेने से प्रतिबंधित कर दिया है।
एनएचएआई ने कहा है कि राष्ट्रीय राजमार्गों पर यात्रियों की सुरक्षित, सुगम और निर्बाध यात्रा सुनिश्चित करने के लिए सतत निगरानी, समयबद्ध रखरखाव और त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई जारी रहेगी।

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