गोरखपुर। पूर्वांचल भागीदारी संकल्प मोर्चा उत्तर प्रदेश तथा भारतीय अपना समाज पार्टी, सत्य क्रांति पार्टी और राष्ट्रीय पूर्वांचल एकता पार्टी के संयुक्त तत्वावधान में बुधवार को भव्य कवि सम्मेलन एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में साहित्य, संस्कृति और समाज सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले कवियों, साहित्यकारों और विभिन्न क्षेत्रों के विशिष्ट व्यक्तियों को सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भारतीय अपना समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजन सिंह सूर्यवंशी, रघुनाथ उपाध्याय, बजरंगी पांडेय और पिंटू साहनी ने कहा कि वर्तमान समय में समाज को जोड़ने और राष्ट्र निर्माण में कलम की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि "अब समय तलवार का नहीं, कलम का है। कलमकारों का सम्मान करना हमारी संस्कृति और राष्ट्र सेवा का सम्मान है।"
वक्ताओं ने कहा कि पूर्वांचल भागीदारी संकल्प मोर्चा सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और जनभागीदारी को मजबूत करने के उद्देश्य से लगातार ऐसे कार्यक्रम आयोजित कर रहा है। उन्होंने दावा किया कि मोर्चा पूर्वांचल में एक सशक्त राजनीतिक एवं सामाजिक शक्ति के रूप में उभर रहा है।
कार्यक्रम का संचालन बजरंगी पांडेय ने किया। मुख्य अतिथि के रूप में साहित्य शिरोमणि डॉ. सौरभ पाण्डेय, राष्ट्रपति पदक से सम्मानित डीवाईएसपी राणा महेंद्र प्रताप सिंह, प्राचार्य गोरखलाल श्रीवास्तव, भारतीय अपना समाज पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अमर सिंह, राष्ट्रीय पूर्वांचल एकता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष रघुनाथ उपाध्याय, जटाशंकर गुरुद्वारा के अध्यक्ष सरदार जसपाल सिंह तथा लोकगायक राजेश श्रीवास्तव सहित अनेक विशिष्ट अतिथियों को सम्मानित किया गया।
इसके अलावा अजीत सिंह, सोनू, राधा कृष्ण उपाध्याय, उमेश मिश्रा, आशीष मिश्रा, अभिषेक सिंह, अमित सिंह, सुनीता शर्मा, कवयित्री सरिता सिंह, मिन्नत गोरखपुरी, गौतम गोरखपुरी सहित कई साहित्यकारों एवं समाजसेवियों को भी सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में पूर्वांचल के बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। देशभक्ति, सांस्कृतिक गौरव और सामाजिक एकता के संदेश से ओतप्रोत इस आयोजन में चिंतामणि पाण्डेय, अजय सिंह, ओम प्रकाश सिंह, इंदु धर पांडेय, सूर्यनाथ मौर्य, हरी प्रसाद मौर्य सहित सैकड़ों लोग उपस्थित रहे। आयोजन को उपस्थित लोगों ने पूर्वांचल की सांस्कृतिक चेतना और सामाजिक जागरूकता को नई दिशा देने वाला बताया।
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