गोरखपुर। जिले में पेट्रोल और डीजल का संकट गहराता जा रहा है। तेल कंपनियों द्वारा ईंधन आपूर्ति में की गई भारी कटौती के चलते शहर और ग्रामीण इलाकों के कई पेट्रोल पंपों पर स्टाक तेजी से घट रहा है। हालात ऐसे बन गए हैं कि कई पंप ड्राई होने की कगार पर पहुंच चुके हैं। स्थिति को गंभीर बताते हुए गोरखपुर पेट्रोलियम ट्रेडर्स एसोसिएशन ने डीएम से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
एसोसिएशन के अध्यक्ष डा. विश्व नारायण सिंह ने डीएम को भेजे पत्र में कहा है कि तेल कंपनियों ने हाल ही में ईंधन आपूर्ति के नियमों में बदलाव किया है। कंपनियां अब वर्ष 2025-26 की ऐतिहासिक बिक्री को आधार बनाकर मई महीने की आपूर्ति तय कर रही हैं। लेकिन तय मानक के मुकाबले भी 25 से 30 प्रतिशत तक की कटौती कर दी गई है। इसके चलते पेट्रोल पंप संचालकों को आवश्यकता से काफी कम ईंधन मिल रहा है।
एसोसिएशन के मुताबिक वर्तमान में अधिकांश पेट्रोल पंपों को केवल 70 से 75 प्रतिशत लक्ष्य के अनुसार ही सप्लाई दी जा रही है। लगातार कम हो रही आपूर्ति के कारण बाजार में असंतुलन की स्थिति बनने लगी है। कई पंपों पर डीजल और पेट्रोल का स्टाक सीमित रह गया है, जिससे वाहन चालकों की चिंता बढ़ने लगी है। ग्रामीण क्षेत्रों में इसका असर कृषि कार्यों पर भी पड़ सकता है, क्योंकि खेती-किसानी में डीजल की बड़ी भूमिका होती है।
व्यापारियों का कहना है कि यदि आने वाले दिनों में आपूर्ति सामान्य नहीं हुई तो लोगों को लंबी कतारों और ईंधन संकट का सामना करना पड़ सकता है। इसका सीधा असर परिवहन व्यवस्था, माल ढुलाई और दैनिक आवागमन पर पड़ेगा। जनहित को देखते हुए एसोसिएशन ने प्रशासन से तत्काल कदम उठाने की अपील की है।
पत्र में मांग की गई है कि डीएम तेल कंपनियों के अधिकारियों के साथ बैठक कर आपूर्ति व्यवस्था को जल्द सामान्य कराएं। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि जिले में पेट्रोल और डीजल की उपलब्धता बनी रहे, ताकि आम जनता को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। एसोसिएशन ने इस मामले की प्रतिलिपि जिला पूर्ति अधिकारी को भी भेजी है। ज्ञापन देने वालों में राजन शाही, डा. वीएन सिंह, राकेश त्रिपाठी, राज बहादुर यादव आदि शामिल रहे।
- पैसा देने के बावजूद डिपो से नहीं मिल रहा तेल
संगठन के डिवीजनल अध्यक्ष राजन शाही ने कहा कि पैसा जमा करने के बावजूद डिपो से तेल नहीं दिया जा रहा है। तेल की यह कमी सिर्फ गलत ढंग से वितरण की वजह से हो रही है। जानकारी के मुताबिक बार्डर वाले पंपों को ज्यादा और प्राथमिकता के आधार पर तेल दिया जा रहा है। अगर वितरण व्यवस्था सही कर दी जाए तो डीजल-पेट्रोल की किल्लत नहीं होगी।
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