बस्ती। शनिवार को बहुजन समाज पार्टी जिलाध्यक्ष जयहिन्द गौतम के संयोजन में पॉलिटेक्निक चौराहे के निकट एक निजी हाल में 19वीं सदी के प्रमुख समाज सुधारक, विचारक और क्रांतिकारी कार्यकर्ता महात्मा ज्योतिबा फुले की जयंती श्रद्धापूर्वक मनाई गई।
कार्यक्रम में मुख्य मंडल प्रभारी धर्मदेव प्रियदर्शी ने कहा कि ज्योतिबा फुले ने जाति व्यवस्था, छुआछूत और महिला उत्पीड़न के खिलाफ संघर्ष करते हुए शिक्षा के प्रसार में ऐतिहासिक योगदान दिया। वर्ष 1873 में उन्होंने ‘सत्यशोधक समाज’ की स्थापना कर वंचित वर्गों को समानता और न्याय दिलाने का अभियान शुरू किया।
मुख्य मंडल प्रभारी कल्पनाथ बाबूजी, उदयभान, के.के. गौतम और लवकुश पटेल ने कहा कि ज्योतिबा फुले एवं उनकी पत्नी सावित्रीबाई फुले ने 1848 में पुणे में लड़कियों के लिए देश का पहला स्कूल खोला। उन्होंने विधवा पुनर्विवाह का समर्थन किया और बाल विवाह व कन्या भ्रूण हत्या जैसी कुरीतियों के खिलाफ संघर्ष किया।
बसपा जिलाध्यक्ष जयहिन्द गौतम ने पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष सुश्री मायावती के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर किए गए पोस्ट का उल्लेख करते हुए बताया कि उन्होंने ज्योतिबा फुले को नमन करते हुए समाजवादी पार्टी पर तीखा प्रहार किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा ने जातिगत द्वेष के चलते महापुरुषों के नाम पर बने जिलों के नाम बदले हैं, जो उनके पीडीए की राजनीति को दर्शाता है।
मायावती ने अपने संदेश में महात्मा फुले को सामाजिक परिवर्तन का पितामह बताते हुए कहा कि शिक्षा के माध्यम से उन्होंने समाज को जागरूक किया। उनके प्रसिद्ध कथन “विद्या बिना मति गई” का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षा ही सामाजिक मुक्ति का आधार है, जिसे आगे चलकर डॉ. भीमराव आंबेडकर ने भी अपनाया।
उन्होंने यह भी कहा कि बसपा सरकार ने महापुरुषों के सम्मान में कई कार्य किए, जिनमें अमरोहा को ज्योतिबा फुले नगर नाम देना शामिल था, जिसे बाद में सपा सरकार ने बदल दिया।
कार्यक्रम में संजय धूसिया, राजेन्द्र प्रसाद, राम सरोज, सीताराम शास्त्री, राना अम्बेडकर, आशुतोष सिंह, अलीम अहमद, प्रमोद कुमार, दीपक कुमार, के.सी. मौर्य, के.पी. राठौर, अनूप कुमार, राजेश प्रताप सिंह, रामानुज भाष्कर एडवोकेट, महेन्द्र कुमार, यशवंत निगम, दीपलाल भारती सहित कई लोग उपस्थित रहे।

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