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Thursday, April 30, 2026

काशी की सांस्कृतिक विरासत को सहेजने की बड़ी पहल : संत शिरोमणि नरहरि महाराज की प्रतिमा और स्मृति द्वार के लिए पीएम को पत्र

वॉयस ऑफ बस्ती संवाददाता


वाराणसी/लखनऊ। भारतीय जनता पार्टी, उत्तर प्रदेश की प्रदेश मंत्री (ओबीसी मोर्चा) श्रीमती ज्योति सोनी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर काशी की आध्यात्मिक गरिमा को नया विस्तार देने का आग्रह किया है। उन्होंने प्रधानमंत्री से निवेदन किया है कि गोस्वामी तुलसीदास के दीक्षा गुरु, संत शिरोमणि नरहरि महाराज के सम्मान में वाराणसी में एक भव्य प्रतिमा और ‘स्मृति द्वार’ का निर्माण कराया जाए।
पत्र में उन्होंने कहा कि नरहरि महाराज केवल एक संत ही नहीं, बल्कि भारतीय भक्ति परंपरा के महत्वपूर्ण स्तंभ रहे हैं। उन्होंने ही गोस्वामी तुलसीदास को दीक्षित किया था, जो भारतीय संस्कृति और साहित्य में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं। ऐसे में काशी की पावन भूमि पर इस ऐतिहासिक गुरु-शिष्य परंपरा को संरक्षित और सम्मानित करना समय की मांग है।
ज्योति सोनी ने यह भी उल्लेख किया कि यह पहल पिछड़ी जाति के अंतर्गत आने वाले स्वर्णकार समाज की आस्था और गौरव से जुड़ी हुई है। समाज लंबे समय से अपनी इस समृद्ध परंपरा को राजकीय संरक्षण के साथ स्थापित होते देखने की अपेक्षा करता रहा है।
पत्र में प्रस्ताव रखा गया है कि वाराणसी के किसी प्रमुख स्थान पर संत नरहरि महाराज की भव्य प्रतिमा स्थापित की जाए, साथ ही श्रद्धालुओं के मार्गदर्शन और सांस्कृतिक पहचान के प्रतीक के रूप में एक आकर्षक ‘स्मृति द्वार’ का निर्माण भी कराया जाए।
श्रीमती सोनी ने प्रधानमंत्री के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि आज काशी अपनी प्राचीन संस्कृति को सहेजते हुए आधुनिक विकास के नए आयाम स्थापित कर रही है। उन्होंने विश्वास जताया कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में स्वर्णकार समाज और पिछड़े वर्ग की इस विशिष्ट सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान और सम्मान मिलेगा।
यह पत्र प्रदेश की राजनीति और सांस्कृतिक जगत में चर्चा का विषय बन गया है, क्योंकि यह पहल काशी की धार्मिक परंपरा और सामाजिक अस्मिता को एक साथ जोड़ने का प्रयास मानी जा रही है।

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