नई दिल्ली। भारत में बच्चों में बढ़ती सोशल मीडिया लत को देखते हुए आंध्र प्रदेश और कर्नाटक ने बड़ा कदम उठाया है। ये दोनों राज्य अलग-अलग आयु समूह के बच्चों के लिए सोशल मीडिया के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने वाले पहले भारतीय राज्य बन गए हैं। दुनियाभर में बच्चों की सुरक्षा और डिजिटल लत को लेकर चल रही बहस के बीच यह फैसला लिया गया है। आंध्र प्रदेश में तेलुगु देशम पार्टी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार ने घोषणा की है कि 13 साल से कम उम्र के बच्चे सोशल मीडिया का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे। वहीं कर्नाटक में कांग्रेस सरकार ने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है।
- आंध्र प्रदेश के सीएम ने कही ये बातें
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने विधानसभा में कहा कि सरकार 90 दिनों के भीतर ऐसा सिस्टम तैयार करेगी जिससे 13 साल से कम उम्र के बच्चे सोशल मीडिया का उपयोग नहीं कर पाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार इस बात पर विचार कर रही है कि इस प्रतिबंध को 13 से 16 साल के किशोरों तक बढ़ाया जाए या नहीं।
- कर्नाटक के सीएम का बयान
दूसरी ओर कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने 2026-27 के राज्य बजट में घोषणा करते हुए कहा कि 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया के उपयोग पर रोक लगाई जाएगी। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि बच्चे मोबाइल फोन रख सकते हैं, लेकिन वे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे।
- क्यों लिया गया ये फैसला?
सरकार का कहना है कि बच्चों में मोबाइल और सोशल मीडिया के बढ़ते इस्तेमाल से उनके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर पड़ रहा है। इसलिए यह कदम बच्चों को डिजिटल लत से बचाने के लिए उठाया गया है। कर्नाटक सरकार जल्द ही एक ऐसा कार्यक्रम तैयार करेगी जिसके जरिए स्कूलों, कॉलेजों और घरों में इस नियम को लागू किया जा सके।
- लोगों और विशेषज्ञों की इस फैसले पर राय
हालांकि कुछ लोग इस फैसले को लागू करना मुश्किल मानते हैं। लोगों का कहना है कि आजकल पढ़ाई का बड़ा हिस्सा मोबाइल ऐप्स और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए होता है। ऐसे में सोशल मीडिया और पढ़ाई से जुड़े ऐप्स को अलग करना आसान नहीं होगा। उनका मानना है कि यह नियम लागू तो हो सकता है, लेकिन इसकी सफलता सीमित हो सकती है।
दूसरी ओर कई विशेषज्ञ इस फैसले को बच्चों के लिए फायदेमंद मानते हैं। मनोविज्ञान और बाल विकास विशेषज्ञों का कहना है कि इससे बच्चों में अवसाद, चिंता, नींद की कमी और शरीर की छवि को लेकर होने वाली समस्याओं का खतरा कम हो सकता है। साथ ही उनकी पढ़ाई और ध्यान केंद्रित करने की क्षमता में भी सुधार हो सकता है। आपको बता दें कि ऑस्ट्रेलिया और इंडोनेशिया जैसे देशों ने भी 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर इसी तरह के प्रतिबंध लागू किए हैं।
No comments:
Post a Comment