नई दिल्ली। दिल्ली के पालम इलाके में बुधवार को हुए भीषण अग्निकांड ने पूरी राजधानी को झकझोर कर रख दिया है। एक चार मंजिला आवासीय इमारत में लगी इस आग में एक ही परिवार के 9 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। इस त्रासदी के बाद अब दिल्ली सरकार और प्रशासन ने घटना की तह तक जाने के लिए मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए हैं। आधिकारिक सूत्रों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। जानकारी के मुताबिक, चार मंजिला आवासीय इमारत में बुधवार को आग लगने से एक ही परिवार के नौ लोगों की मौत हो गई।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के आदेश पर मजिस्ट्रेट जांच में घटना के बारे में सूचित किए जाने के समय और दमकल विभाग द्वारा की गई कार्रवाई के संबंध में जांच की जा रही है। मामले की प्रारंभिक जांच में इमारत के भूतल पर बिजली के बोर्ड में शॉर्ट सर्किट से आग लगने की आशंका जताई गई है। हालांकि, सटीक कारण फॉरेंसिक रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होगा।
- जांच के मुख्य बिंदु: कहाँ हुई चूक?
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के निर्देश पर शुरू हुई इस जांच में मुख्य रूप से तीन पहलुओं पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है :
दमकल विभाग की प्रतिक्रिया : क्या अग्निशमन विभाग को सूचना मिलने और उनके मौके पर पहुँचने के समय में कोई विसंगति थी?
तकनीकी खामियां : स्थानीय निवासियों का आरोप है कि मौके पर पहुँचे तीन दमकल वाहनों में से दो में पानी का दबाव (Water Pressure) कम था, जिससे बचाव अभियान में बहुमूल्य समय बर्बाद हुआ।
ज्वलनशील सामग्री का भंडारण : जांच में यह बात सामने आई है कि आवासीय इमारत के बेसमेंट, ग्राउंड फ्लोर और पहली मंजिल का उपयोग व्यावसायिक उद्देश्यों (कपड़े और सौंदर्य प्रसाधन) के भंडारण के लिए किया जा रहा था।
सूत्रों के अनुसार, इमारत के बेसमेंट, भूतल और पहली मंजिल का उपयोग कपड़े और सौंदर्य प्रसाधनों के भंडारण के लिए किया जा रहा था, जबकि परिवार ऊपरी मंजिलों पर रहता था। स्थानीय लोगों ने दावा किया कि ज्वलनशील सामग्री के कारण आग तेजी से फैली और मौके पर पहुंचे तीन दमकल वाहनों में से दो में पानी का दबाव कम होने से अभियान में देरी हुई।
- प्रशासन का अगला कदम
मजिस्ट्रेट जांच की रिपोर्ट आने के बाद दोषी अधिकारियों और इमारत के मालिक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की उम्मीद है। यह घटना एक बार फिर दिल्ली के रिहायशी इलाकों में चल रहे अवैध गोदामों और सुरक्षा मानकों की अनदेखी पर बड़े सवाल खड़े करती है।
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