- ढोंग व पाखंड के खिलाफ थे संत शिरोमणि रविदास - विंदेश्वरी
बस्ती। ढकोसले व अंधविश्वास के विरुद्ध क्रांति की अलख जगाने वाले संत परंपरा के महान योगी गुरु रविदास हम लोगों के प्रेरणा स्रोत हैं। संत रविदास का विचार दर्शन सामाजिक समरसता, नैतिक चेतना और मानवीय मूल्यों का आधार प्रस्तुत करता है।
यह बातें पोखरनी गांव में आयोजित तीन दिवसीय संत रविदास जयंती कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पूर्व मंत्री एपीएन पीजी कॉलेज व समाजसेवी विंदेश्वरी लाल श्रीवास्तव ने कही। उन्होंने संत से संबंधित कहानियों को संगीतमयी रूप से प्रस्तुत कर सबको भावविभोर कर दिया। यहां पिछले चार दशक से आयोजित होने वाले तीन दिवसीय समारोह के दौरान धार्मिक अनुष्ठान व सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए गए। साथ ही मेले का आयोजन किया गया। जिसका मेलार्थियों ने आनंद उठाया।
आचार्य राजेश प्रसाद ने कहा कि संत शिरोमणि रविदास ने समाज में फैली बुराइयों की तीखी आलोचना की, वह अंधविश्वास व ढकोसले के खिलाफ थे। उन्होंने मन चंगा तो कठौती में गंगा की कहावत कह कर लोगों को अंधविश्वास से दूर रहने की नसीहत दिया। साथ ही आगे बढ़कर परोपकार की भावना से कार्य करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने संत शिरोमणि रविदास के बताए रास्तों पर चलने के लिए लोगों को उपदेशित किया। संयोजक डॉ. जयसिंह व पूर्व बीडीसी सदस्य बब्लू ने विधि विधान से पूजन व धार्मिक अनुष्ठान को पूर्ण करवाया। इस दौरान नगर पुलिस मुस्तैद रही। आयोजक मंडल के डॉ. जयसिंह व अनूप साजू आदि ने आगंतुकों के प्रति आभार जताया। इस मौके पर राम यज्ञ एडवोकेट, चौधरी शेर सिंह, सुनील गौतम, नरेंद्र कुमार, हरिप्रसाद, लालमन प्रसाद, राधेश्याम, राहुल, कालिका व पवन समेत बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
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