वैचारिक आत्मदैन्य से मुक्ति जरूरी : संजय द्विवेदी
इंदौर। ‘मातृभाषा उन्नयन संस्थान’ द्वारा प्रेस क्लब, इंदौर में आयोजित हिन्दी गौरव अलंकरण समारोह में वर्ष 2026 के सम्मान वरिष्ठ साहित्यकार नर्मदाप्रसाद उपाध्याय और वरिष्ठ पत्रकार अतुल तारे को प्रदान किए गए। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि हिमाचल प्रदेश के पूर्व राज्यपाल विष्णु सदाशिव कोकजे रहे, जबकि अध्यक्षता देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. राकेश सिंघई ने की।
मुख्य अतिथि कोकजे ने कहा कि प्राथमिक शिक्षा मातृभाषाओं में होने से ही देश की वास्तविक प्रगति संभव है। इच्छाशक्ति के बल पर ही भाषाओं का संरक्षण और विस्तार हो सकता है। विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित भारतीय जन संचार संस्थान के पूर्व महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी ने कहा कि भाषा और भारतीयता की चिंता आवश्यक है। उन्होंने कहा कि वैचारिक आत्मदैन्य से मुक्ति जरूरी है, क्योंकि इससे आत्मविश्वास कमजोर होता है।
कुलगुरु प्रो. सिंघई ने विश्वास जताया कि भविष्य की चुनौतियों के बीच भी हिन्दी सशक्त रहेगी, बशर्ते देवनागरी लिपि का संरक्षण किया जाए। सम्मानित साहित्यकार नर्मदाप्रसाद उपाध्याय ने हिन्दी की लोक परंपरा को उसकी शक्ति बताया, वहीं अतुल तारे ने कहा कि एआई के दौर में अपनी भाषा से जुड़ाव आत्मबोध कराता है और समाचार पत्रों की भूमिका आज भी महत्वपूर्ण है।
समारोह में विभिन्न शहरों के साहित्यकारों को काव्य गौरव अलंकरण से सम्मानित किया गया तथा संध्या राणे के कविता संग्रह ‘शुभम् करोति’ का लोकार्पण भी हुआ। कार्यक्रम में अनेक साहित्यकार और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

No comments:
Post a Comment