वॉयस ऑफ बस्ती संवाददाता
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव डॉ. पी. के. मिश्र ने इंटीग्रेटेड रिसर्च एंड एक्शन फॉर डेवलपमेंट में आयोजित ‘सस्टेनेबल एनर्जी ट्रांज़िशन – ग्लोबल पर्सपेक्टिव’ विषयक अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि स्वच्छ ऊर्जा विकसित भारत के विजन में गहराई से समाहित है। उन्होंने कहा कि यह अब केवल किसी एक सेक्टर का एजेंडा नहीं, बल्कि विकास, प्रतिस्पर्धात्मकता, सामाजिक समावेश और ऊर्जा सुरक्षा का अहम आधार बन चुका है।
डॉ. मिश्र ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कथन का उल्लेख करते हुए कहा कि विकसित भारत का निर्माण स्वच्छ ऊर्जा, हरित विकास और सतत जीवनशैली पर आधारित होगा। उन्होंने बताया कि 2014 के बाद भारत की ऊर्जा यात्रा से दो महत्वपूर्ण सबक मिले हैं—पहला, महत्वाकांक्षी लक्ष्य तभी सफल होते हैं जब उन्हें मजबूत संस्थागत ढांचा और निरंतर वित्तीय समर्थन मिले; दूसरा, ऊर्जा परिवर्तन तभी टिकाऊ बनता है जब उससे आम जनता को प्रत्यक्ष लाभ प्राप्त हो।
उन्होंने कहा कि पीएम-कुसुम, पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना, सौर विनिर्माण और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी ने यह सिद्ध किया है कि डीकार्बोनाइजेशन और आर्थिक विकास एक-दूसरे के पूरक हो सकते हैं। भारत ने 2005 से 2020 के बीच जीडीपी की एमिशन इंटेंसिटी में लगभग 36 प्रतिशत की कमी की है और पेरिस समझौते की प्रतिबद्धताओं को समय से पहले पूरा करने वाला पहला जी-20 देश बना है।
डॉ. मिश्र ने राष्ट्रीय सौर मिशन, राष्ट्रीय हाइड्रोजन मिशन, जैव ईंधन नीति और परमाणु ऊर्जा में निजी भागीदारी जैसे कदमों को ऊर्जा सुरक्षा और रणनीतिक स्वायत्तता की दिशा में ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि स्वच्छ ऊर्जा के लाभ सीधे घरों तक पहुंच रहे हैं, जिससे उपभोक्ता अब ऊर्जा प्रणाली में भागीदार और उत्पादक दोनों बन रहे हैं।
अंत में उन्होंने कहा कि भारत ग्लोबल साउथ के लिए न्यायसंगत, समावेशी और विकासोन्मुख ऊर्जा परिवर्तन की वकालत करता रहा है और जलवायु न्याय, वित्त तथा प्रौद्योगिकी हस्तांतरण पर उसका रुख स्पष्ट और सशक्त है।

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