वॉयस ऑफ बस्ती संवाददाता
गोरखपुर। रेलवे द्वारा संरक्षा को सुदृढ़ करने एवं रेलवे परिचालन को अधिक सुगम बनाने के उद्देश्य से निरंतर आधुनिकीकरण किया जा रहा है। सभी क्षेत्रों में नई तकनीक का समावेश करते हुए डिजिटलीकरण को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसी कड़ी में पूर्वोत्तर रेलवे पर 1525 आधुनिक एवं उन्नत डिजिटल वॉकी-टॉकी सेट का प्रावधान किया गया है।
इनमें से 845 डिजिटल वॉकी-टॉकी सेट लोको पायलट (ड्राइवर) एवं गार्ड सहित क्रू कर्मियों द्वारा उपयोग किए जा रहे हैं, जबकि शेष 680 सेट रेल संचलन से जुड़े अन्य रेलकर्मियों को उपलब्ध कराए गए हैं।
आधुनिक डिजिटल वॉकी-टॉकी सेट में बेहतर स्पीच क्वालिटी उपलब्ध है, जिसकी रेंज पुराने वॉकी-टॉकी की तुलना में अधिक है। साथ ही इनका बैटरी बैक-अप भी पहले से कहीं बेहतर है। इन वॉकी-टॉकी की प्रोग्रामिंग एनालॉग एवं डिजिटल दोनों फ्रिक्वेंसी पर की गई है, जिससे इसकी क्षमता पहले उपयोग में लाई जा रही एनालॉग वॉकी-टॉकी की अपेक्षा लगभग दोगुनी हो गई है।
यह आधुनिक वॉकी-टॉकी वॉइस के साथ-साथ डाटा कम्यूनिकेशन की सुविधा भी प्रदान करता है, जिससे डाटा रिकॉर्ड किया जा सकता है। जबकि पुराने वॉकी-टॉकी केवल वॉइस कम्यूनिकेशन तक ही सीमित थे। इसमें अधिकतम 16 चैनलों की क्षमता है, जिससे एक समय में 16 अलग-अलग स्थानों पर संचार संभव है। वहीं पुराने वॉकी-टॉकी में केवल 8 चैनल ही उपलब्ध थे।
रेलवे प्रशासन के अनुसार, इन आधुनिक डिजिटल वॉकी-टॉकी सेटों के उपयोग से रेलकर्मियों की कार्यक्षमता में वृद्धि होगी, रेल परिचालन और अधिक सुचारु बनेगा तथा रेल संरक्षा को और मजबूती मिलेगी।
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