महादेवा (बस्ती)। विकास खंड कुदरहा अंतर्गत ग्राम पंचायत अकेला कुबेरपुर (पोस्ट गोनार) में तैनात बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) को बिना किसी पूर्व सूचना और बिना उच्चाधिकारियों के लिखित आदेश के हटाए जाने का मामला सामने आया है। पीड़ित बीएलओ धर्मराज ने जिलाधिकारी बस्ती को प्रार्थना पत्र देकर न्याय की गुहार लगाई है। साथ ही उन्होंने बीते छह माह से मानदेय न मिलने की शिकायत भी की है।
बीएलओ धर्मराज का कहना है कि वह जुलाई/अगस्त 2025 से ग्राम पंचायत अकेला कुबेरपुर में पूरी निष्ठा, ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन कर रहे थे। आरोप है कि रविवार 4 जनवरी 2026 को, जो कि सरकारी अवकाश का दिन था, ग्राम प्रधान के भतीजे द्वारा उन्हें यह सूचना दी गई कि एसडीएम के आदेश से उन्हें बीएलओ पद से हटा दिया गया है। अवकाश के दिन किसी प्रकार का आधिकारिक आदेश जारी होना संदेह के घेरे में है।
जिलाधिकारी को दिए गए प्रार्थना पत्र में धर्मराज ने आरोप लगाया है कि ग्राम प्रधान के भतीजे रामप्रीत यादव (सफाई कर्मचारी) तथा बाबूराम यादव द्वारा उन पर फर्जी मतदाताओं और सैकड़ों नाबालिगों के नाम मतदाता सूची में जोड़ने का दबाव बनाया जा रहा था। आरोप है कि इसके लिए जबरन दस्तावेज भी उपलब्ध कराए गए, लेकिन नियमों के विरुद्ध कार्य करने से इंकार करने पर उन्हें साजिश के तहत पद से हटाया गया।
उन्होंने बताया कि 24 दिसंबर 2025 से 30 दिसंबर 2025 तक दावे और आपत्तियां प्राप्त की गईं तथा 31 दिसंबर 2025 से 3 जनवरी 2026 तक बीएलओ सुपरवाइजर के निर्देशन में सभी दावों व आपत्तियों का निस्तारण कर पांडुलिपि तैयार की गई। 4 जनवरी को अवकाश होने के कारण दस्तावेज जमा नहीं हो सके। इसके बाद 5 जनवरी 2026 को जब वह समस्त दस्तावेज लेकर बस्ती तहसील निर्वाचन कार्यालय पहुंचे, तो उन्हें बताया गया कि उनके स्थान पर किसी अन्य व्यक्ति को बीएलओ नियुक्त कर दिया गया है।
बीएलओ धर्मराज का कहना है कि बिना किसी लिखित आदेश और सूचना के हटाया जाना पूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़े करता है। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि पिछले छह महीनों से उन्हें मानदेय का भुगतान नहीं किया गया है।
मामले को लेकर प्रशासनिक हलकों में चर्चाएं तेज हैं। अब देखना यह है कि जिलाधिकारी इस प्रकरण में क्या कार्रवाई करते हैं और पीड़ित बीएलओ को न्याय मिल पाता है या नहीं।

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