वॉयस ऑफ बस्ती संवाददाता
नई दिल्ली/लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन का भव्य शुभारंभ हुआ। तीन दिवसीय इस राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन उत्तर प्रदेश की माननीय राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने किया। उद्घाटन सत्र में लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला ने मुख्य संबोधन दिया। सम्मेलन में देश के 28 राज्यों, 3 केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं तथा 6 विधान परिषदों के पीठासीन अधिकारी सहभागिता कर रहे हैं।
इस अवसर पर उत्तर प्रदेश विधान सभा अध्यक्ष सतीश महाना ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का शुभकामना संदेश पढ़कर सुनाया। अपने संबोधन में लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि पीठासीन अधिकारियों का आचरण दलगत राजनीति से ऊपर उठकर पूर्णतः न्यायपूर्ण, निष्पक्ष और निष्पक्ष दिखने वाला होना चाहिए। उन्होंने कहा कि विधायिका के माध्यम से जनता की आकांक्षाएं शासन तक पहुँचती हैं, इसलिए राज्य विधानमंडलों की घटती कार्यवाही का समय गंभीर चिंता का विषय है। सदन के अधिक समय तक संचालन से ही सार्थक, गंभीर और परिणामोन्मुख चर्चाएं संभव हैं।
श्री बिरला ने कहा कि सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी और सोशल मीडिया के दौर में जनप्रतिनिधियों के आचरण पर जनता की सतत निगरानी रहती है, ऐसे में संसदीय शिष्टाचार और अनुशासन का महत्व और बढ़ गया है। उन्होंने सदन की प्रामाणिकता बनाए रखने को सभी की सामूहिक जिम्मेदारी बताया।
उन्होंने कहा कि अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन जैसे मंच लोकतांत्रिक संस्थाओं के बीच सहयोग, समन्वय और सुशासन को मजबूत करते हैं। साथ ही यह मंच नीतियों और कल्याणकारी योजनाओं में राष्ट्रीय स्तर पर सामंजस्य स्थापित करने में सहायक है। सम्मेलन के आगामी सत्रों में विधायी प्रक्रियाओं में तकनीक के उपयोग, विधायकों के क्षमता निर्माण और विधायिका की जवाबदेही जैसे विषयों पर गहन चर्चा होगी।
यह चौथी बार है जब उत्तर प्रदेश इस प्रतिष्ठित सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है। सम्मेलन का समापन 21 जनवरी 2026 को होगा, जिसे लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला संबोधित करेंगे।

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