वॉयस ऑफ बस्ती संवाददाता
गोरखपुर। राज्य सरकार द्वारा कर्मचारियों के हित में समय-समय पर की गई घोषणाओं के बावजूद अधिकांश मांगें आज भी लंबित हैं। वेतन, पेंशन, भत्ते और सेवा शर्तों से जुड़े मुद्दों पर कोई ठोस समाधान न होने से कर्मचारियों में गहरा असंतोष व्याप्त है। यह बातें कर्मचारी नेता रूपेश कुमार श्रीवास्तव ने कही।
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि पुरानी पेंशन योजना (ऑप्स) की बहाली के बिना कर्मचारियों का भविष्य सुरक्षित नहीं है, जबकि एनपीएस/यूपीएस कर्मचारियों के हितों की रक्षा करने में असफल रही है। महंगाई के इस दौर में 50 प्रतिशत महंगाई भत्ता मूल वेतन में जोड़ने की मांग वर्षों से लंबित है। साथ ही 60, 65, 70 और 75 वर्ष की आयु पर मिलने वाली सुविधाओं के क्रियान्वयन में भी असमानता बनी हुई है।
नेताओं ने आरोप लगाया कि चिकित्सा, आवास, एसीपी, पदोन्नति और सेवा संबंधी मामलों में प्रशासनिक उदासीनता लगातार बनी हुई है। दीनदयाल/पीएम-सीएम कैशलेस स्वास्थ्य योजना कागजों तक सीमित है और कर्मचारियों को इलाज के लिए जेब से भुगतान करना पड़ रहा है।
कर्मचारी संगठनों ने चेतावनी दी कि यदि वर्ष 2026 से पूर्व सभी लंबित मांगों का समाधान नहीं किया गया तो राज्यव्यापी आंदोलन किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
इस अवसर पर मदन मुरारी शुक्ल, पं. श्याम नारायण शुक्ल, राजेश सिंह, अनिल द्विवेदी सहित अनेक कर्मचारी नेता उपस्थित रहे।

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