लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा का आज से मानसून सत्र शुरू हो रहा है। इससे पहले अतीक अहमद और उनके भाई अशरफ अहमद एक बार फिर चर्चा में हैं। चर्चा इस बात की है कि क्या यूपी विधानसभा में उन्हें श्रद्धांजिली दी जाएगी? तो बता दें कि नियमों के मुताबिक आज से शुरू होने वाले सत्र से पहले अतीक ब्रदर्स को श्रद्धांजिली दी जाएगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी उन्हें श्रद्धांजिली देंगे। इससे पहले लोकसभा में भी सांसदों ने अतीक और अशरफ को श्रद्धांजिली दी थी। दोनों भाइयों का अपना राजनीतिक इतिहास है। वे अलग-अलग दलों से कई बार विधायक रहे हैं।
उत्तर प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र सोमवार यानी आज से शुरू हो रहा है। सत्र के पहले दिन नेता सदन योगी आदित्यनाथ, नेता प्रतिपक्ष अखिलेश यादव, नेता विधान मण्डल दल कांग्रेस आराधना मिश्रा, नेता विधान मण्डल दल जन सत्ता दल रघुराज प्रताप सिंह, बसपा नेता उमा शंकर सिंह और सुभासपा नेता ओम प्रकाश राजभर समेत सभी दलों के नेता दिवंगत विधायक हरि शंकर तिवारी, अतीक़ अहमद और ख़ालिद अजीम उर्फ अशरफ को श्रद्धांजलि देंगे।
सीएम योगी ने विधानसभा में माफिया को दी थी धमकी
अतीक अहमद बीएसपी विधायक राजू पाल मर्डर का इकलौता चश्मदीद उमेश पाल की हत्या के मुख्य आरोपियों में एक था। अतीक ब्रदर्स की प्रयागराज में पुलिस की घेरेबंदी में तीन लड़कों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। इसके बाद विपक्ष ने कानून व्यवस्था को लेकर योगी आदित्यनाथ सरकार को घेरा था। सीएम योगी ने भी पलटवार किया था और कहा था कि सरकार माफिया राज खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध है। सीएम योगी ने इसी साल फरवरी में विधानसभा में धमकी दी थी कि वह “माफियाओं को मिट्टी में मिला देंगे।”
अतीक-अशरफ का राजनीतिक सफर
अतीक अहमद ने 1989 में निर्दलीय के रूप में इलाहाबाद पश्चिम विधानसभा सीट जीतकर यूपी की राजनीति में कदम रखा था। इसके बाद लगातार दो बार इसी सीट से जीते। 1993, 1996 में अतीक ने समाजवादी पार्टी के टिकट पर इसी सीट से चुनाव लड़ा। समाजवादी पार्टी ने बाद में अतीक अहमद को पार्टी से निकाल दिया। इसके बाद उन्होंने 2002 में अपना दल के टिकट पर चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। 2003 में सपा में वापसी की और 2004 के लोकसभा चुनाव में फूलपुर संसदीय सीट से जीत हासिल की। इसी तरह उनके भाई अशरफ भी यूपी विधानसभा के सदस्य रह चुके हैं। 2005 में राजू पाल की हत्या के बाद हुए चुनाव में उन्होंने इलाहाबाद पश्चिम सीट से जीत हासिल की। अशरफ राजू पाल की हत्या के आरोपियों में से एक था। प्रयागराज लाए जाने से पहले वह बरेली जेल में बंद था।
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